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Balotra News: मंगला आरती से रात्रि जागरण तक भक्तिमय रहा जसोलधाम, देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा Published by: बालोतरा ब्यूरो Updated Fri, 02 Jan 2026 07:52 AM IST
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सार

जसोलधाम स्थित विश्वविख्यात श्री राणी भटियाणी माता मंदिर में पौष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी और नववर्ष 2026 के शुभ संयोग पर भव्य धार्मिक, पूजन एवं सांस्कृतिक आयोजनों का आयोजन हुआ। मंगला आरती से लेकर विशेष पूजा-अर्चना, अन्नपूर्णा प्रसादम, लाइव आरती और रात्रि जागरण तक पूरे दिन मंदिर परिसर भक्ति और आस्था से सराबोर रहा।

From Mangala Aarti to night vigil, Jasoldham resonated, devotees arrived from all over the country and abroad.
श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
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विस्तार
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जसोलधाम स्थित विश्वविख्यात श्री राणी भटियाणी माता मंदिर में पौष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन, पुण्य एवं अत्यंत शुभ अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजन कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक आयोजनों का भव्य आयोजन पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस वर्ष अंग्रेजी नववर्ष 2026 का शुभारंभ त्रयोदशी जैसी सिद्ध एवं विशेष पूजनीय तिथि से होने के दुर्लभ संयोग ने इस आयोजन को और अधिक मंगलकारी एवं ऐतिहासिक बना दिया।
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इस पावन अवसर पर जसोलधाम में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मां जसोल के जयकारों से संपूर्ण क्षेत्र गूंज उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। पौष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी की पावन प्रातः बेला में मां जसोल की मंगला आरती के साथ धार्मिक आयोजनों का शुभारंभ हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों, दूर-दराज के गांवों एवं विदेशों से पधारे भक्तों ने मां जसोल के पावन दर्शन कर नववर्ष 2026 के लिए सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं पारिवारिक खुशहाली की मंगल कामनाएं कीं।
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पूरे दिन मंदिर परिसर 'जय मां जसोल' और 'राणी भटियाणी माता की जय' के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था, विश्वास और आनंद की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को जसोलधाम की परंपरा में विशेष सिद्ध एवं अत्यंत पूजनीय तिथि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से मां जसोल की आराधना करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक मान्यता के अनुरूप त्रयोदशी के पावन अवसर पर मां जसोल की विशेष पूजा-अर्चना, आरती एवं विधिवत अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

नववर्ष 2026 का शुभारंभ इसी पावन तिथि से होने के कारण इस वर्ष त्रयोदशी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ गया। श्रद्धालुओं ने इस दुर्लभ संयोग को ईश्वरीय कृपा का प्रतीक बताते हुए स्वयं को सौभाग्यशाली बताया।

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इस विशेष अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था के लिए व्यापक प्रबंध किए गए। प्रवेश एवं निकासी मार्गों पर सुचारु लाइनिंग सिस्टम, पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मियों एवं स्वयंसेवकों की तैनाती, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल सुविधा तथा सीसीटीवी निगरानी की प्रभावी व्यवस्था रही। संस्थान के कुशल प्रबंधन एवं सेवाभावी कार्यशैली के चलते दर्शन प्रक्रिया शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सहज रूप से संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।

त्रयोदशी के पावन अवसर पर अन्नपूर्णा प्रसादम (भोजन प्रसादी) का भव्य आयोजन भी किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसादी ग्रहण की और मां जसोल का आशीर्वाद प्राप्त किया। अन्नदान के इस आयोजन ने सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश दिया। सेवाभाव से जुड़े स्वयंसेवकों द्वारा पूरे अनुशासन और श्रद्धा के साथ प्रसादी वितरण किया गया, जिससे यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव बन गया।

शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं ने जसोलधाम स्थित समस्त मंदिरों में विधिवत दर्शन एवं पूजन किया। भक्तों ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी मंदिर एवं श्री काला-गौरा भैरूजी मंदिर में श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर लोक-देवताओं से परिवार, समाज एवं राष्ट्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

संध्याकाल में मां जसोल की भव्य आरती का लाइव प्रसारण किया गया, जिसके माध्यम से देश-विदेश में निवासरत भक्तों ने भी पावन दर्शन का लाभ लिया। इसके पश्चात आयोजित रात्रि जागरण में स्थानीय भजनियों ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। लाइव आरती के दौरान पुष्कर से आए नगाराची कलाकारों एवं स्थानीय दमामी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने आयोजन को और अधिक भव्यता प्रदान की। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों की स्वर-लहरियों और लोक वाद्य यंत्रों की थाप ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया। नववर्ष 2026 एवं पौष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के इस दुर्लभ और शुभ संयोग पर जसोलधाम में आयोजित सभी धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यक्रम पूर्ण श्रद्धा, शांति और गरिमा के साथ संपन्न हुए।
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