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'चांदीपुरा वायरस' की दस्तक: दो मासूमों की मौत के बाद अलर्ट मोड पर स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान-गुजरात सीमा पर खौफ

Sat, 25 Jul 2026 12:38 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो Updated Sat, 25 Jul 2026 12:38 PM IST
सार

चांदीपुरा वायरस का खतरा अब राजस्थान के दूसरे जिले तक पहुंच गया है। डूंगरपुर के बाद सिरोही में भी एक बच्ची की मौत के मामले ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है। विशेषज्ञ सैंड फ्लाई को संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण मान रहे हैं।

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Rajasthan: Chandipura Virus Raises Alarm After Two Child Deaths; Rajasthan-Gujarat Border Districts on Alert
संक्रमण को रोकने के लिए ग्रामीणों से जागरूक रहने की अपील - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डूंगरपुर में जुलाई के तीसरे सप्ताह में एक बालिका की मौत के बाद अब सिरोही जिले में भी चांदीपुरा वायरस से एक बच्ची की मौत का मामला सामने आया है। लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि राजस्थान और गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ही यह वायरस अधिक क्यों दिखाई दे रहा है। हालांकि इस संबंध में दोनों राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अभी तक कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

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डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा उपखंड स्थित रतनपुरा गांव की एक बच्ची की 15 जुलाई को मौत हो गई थी। बाद में उसकी मौत का कारण चांदीपुरा वायरस संक्रमण बताया गया। अब सिरोही जिले में भी एक बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। इससे पहले गुजरात के गांधीनगर, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहल जिलों में भी इस वायरस के मामले सामने आ चुके हैं।
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2026 का पहला मामला डूंगरपुर में
राजस्थान में वर्ष 2026 में चांदीपुरा वायरस संक्रमण का पहला मामला डूंगरपुर जिले में सामने आया। रतनपुरा गांव की बच्ची को 12 जुलाई को तेज बुखार और अन्य गंभीर लक्षणों के बाद गुजरात के हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 जुलाई को उसके नमूने जांच के लिए भेजे गए, लेकिन उसी दिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई और परिजन शव लेकर गांव लौट आए।
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घर-घर चल रहा सर्वे

उस समय स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को इस मामले की जानकारी नहीं मिल सकी। बाद में हिम्मतनगर अस्पताल ने जांच संबंधी जानकारी गुजरात स्वास्थ्य विभाग को भेजी। मरीज के डूंगरपुर निवासी होने के कारण गुजरात सरकार ने यह सूचना राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई। 18 जुलाई को सूचना मिलने के बाद डूंगरपुर स्वास्थ्य विभाग ने रतनपुरा गांव में विशेष सर्वे और स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया। घर-घर स्क्रीनिंग के दौरान किसी अन्य व्यक्ति में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण नहीं मिले। एहतियात के तौर पर गांव में अब भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सैंड फ्लाई को माना जा रहा प्रमुख कारण
डूंगरपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंड फ्लाई (रेतीली मक्खी) के माध्यम से फैलता है। कुछ मामलों में मच्छरों की भूमिका भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि सैंड फ्लाई प्रायः पशुओं के आसपास पाई जाती है। आदिवासी क्षेत्रों में पशुशालाएं अक्सर घरों से सटी होती हैं, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। यह संक्रमण विशेष रूप से बच्चों के लिए अधिक गंभीर साबित हो सकता है।



गांवों में निगरानी कर रही स्वास्थ्य विभाग की टीमें

गांव में लगातार निगरानी
स्वास्थ्य विभाग की टीमें रतनपुरा गांव में लगातार सर्वे और निगरानी कर रही हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि यदि किसी बच्चे या अन्य व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं, ताकि समय पर उपचार मिल सके। फिलहाल गांव की स्थिति सामान्य है और संक्रमण नियंत्रण के सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।


विशेष सर्वे और जांच अभियान शुरू

गुजरात में 12 बच्चों की मौत
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुजरात में पिछले करीब डेढ़ महीने के दौरान 12 बच्चों की मौत हुई है। इनमें तीन बच्चों में चांदीपुरा वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य नौ मामलों में भी इसी वायरस की आशंका जताई गई है।


राजस्थान के सीमावर्ती बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही, उदयपुर और जालौर जिले गुजरात के दाहोद, साबरकांठा, खेड़ा, अरावली और पंचमहल जिलों से जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों के बीच लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहती है, जिसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्कता बरत रहा है।

 

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