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जयपुर मेट्रो फेज-2: बदलेगा शहर का ट्रैफिक सिस्टम, शिक्षा और औद्योगिक क्षेत्र जुड़ेंगे, आधी आबादी को सीधा फायदा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 08 Apr 2026 05:19 PM IST
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सार

जयपुर मेट्रो फेज-II को मंजूरी मिल गई है। 41 किमी लंबे कॉरिडोर से आधी आबादी को फायदा होगा। प्रमुख शैक्षणिक, कोचिंग और औद्योगिक क्षेत्र जुड़ेंगे, जिससे ट्रैफिक जाम में राहत और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा।

Jaipur Metro Phase-II Approved: Direct Benefit to Half the City, Relief from Traffic Congestion
जयपुर मेट्रो फेज 2 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जयपुर मेट्रो फेज-II को लेकर बड़ी खबर सामने आई है, जो शहर की आधी आबादी के लिए राहत लेकर आ सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। करीब 41 किलोमीटर लंबे नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर पर बनने वाली इस मेट्रो लाइन में 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं और इसकी कुल लागत 13,037.66 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह कॉरिडोर प्रह्लादपुरा (टोंक रोड के पास) से टोड़ी मोड़ (सीकर रोड) तक विकसित किया जाएगा।

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मेट्रो फेज-II का रूट ट्रैफिक सर्वे, फील्ड स्टडी और आर्थिक विश्लेषण के आधार पर तय किया गया है। पहले जहां अंबाबाड़ी से सीतापुरा तक सीमित योजना थी, वहीं अब इसे विस्तार देकर शहर के बड़े हिस्से को कवर किया गया है। नई योजना के तहत यह कॉरिडोर जयपुर के सबसे व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाकों को जोड़ेगा, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या में लंबे समय तक राहत मिलने की उम्मीद है।

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इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहर के प्रमुख शैक्षणिक और कोचिंग हब- जगतपुरा, गोपालपुरा, राजस्थान यूनिवर्सिटी, महारानी कॉलेज, महाराजा कॉलेज, कॉमर्स कॉलेज, राजस्थान कॉलेज सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। इसके अलावा जयपुर के दो बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को भी मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे रोजाना आवागमन आसान होगा और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

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अब तक जयपुर मेट्रो घाटे का प्रोजेक्ट था लेकिन अब फेज टू में नया रूट जुड़ने के साथ मेट्रो मुनाफे का प्रोजेक्ट बन सकता है। 

सरकार इस प्रोजेक्ट के साथ ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल पर भी काम कर रही है। राजस्थान टाउनशिप नीति-2024 और TOD नीति-2025 के तहत मेट्रो स्टेशनों के आसपास 5 से 10 मिनट की पैदल दूरी के भीतर उच्च घनत्व वाला विकास किया जाएगा। जयपुर विकास प्राधिकरण ने इसके लिए पांच प्रमुख TOD कॉरिडोर भी चिन्हित किए हैं, जहां 800 मीटर के दायरे में आवासीय, व्यावसायिक और कार्यालय उपयोग का मिश्रित विकास होगा। इसका उद्देश्य लोगों को निजी वाहनों से हटाकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर आकर्षित करना है।

फिलहाल जयपुर मेट्रो का फेज-1 कॉरिडोर मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक संचालित है। फेज-II के पूरा होने के बाद शहर का मेट्रो नेटवर्क काफी विस्तृत हो जाएगा और रिहायशी व औद्योगिक इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। अगर सभी स्वीकृतियां और प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में जयपुर को आधुनिक, तेज और सुविधाजनक मेट्रो नेटवर्क का बड़ा लाभ मिल सकता है।

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