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Rajasthan: कांग्रेस नेता ने चुनाव लड़ने के लिए बनवाया था फर्जी रिजल्ट, ACJM कोर्ट ने सुनाई 7 साल जेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा
Published by: भीलवाड़ा ब्यूरो
Updated Thu, 05 Feb 2026 06:22 PM IST
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सार
Rajasthan: भीलवाड़ा जिले के कांग्रेस नेता पृथ्वीराज मीणा ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता दिखाने हेतु फर्जी रिजल्ट बनवाया था। कोर्ट में आरोप सिद्ध होने पर ACJM कोर्ट ने कांग्रेस नेता को सात-सात साल की जेल और दो धाराओं में 10-10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया।
आरोपी कांग्रेस नेता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चुनाव लड़ने के लिए फर्जी रिजल्ट तैयार करवाना भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर क्षेत्र के पूर्व जिला परिषद सदस्य और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज मीणा के लिए भारी पड़ गया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपनी शैक्षणिक योग्यता दर्शाकर चुनाव लड़ने के मामले में जहाजपुर एसीजेएम न्यायालय ने उन्हें दोषी करार देते हुए सात-सात साल की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दो अलग-अलग धाराओं में 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सजा सुनाने के साथ ही एसीजेएम न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव चौधरी ने दोषी को तत्काल जेल भेजने का भी आदेश दिया।
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सही पाए गया आरोप
स्थानीय न्यायालय के लोक अभियोजक देवेंद्र कुमार ने बताया कि पृथ्वीराज मीणा ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी शैक्षणिक योग्यता दिखाने हेतु फर्जी रिजल्ट तैयार करवाई थी। यह रिजल्ट वास्तविक शैक्षणिक संस्था द्वारा जारी नहीं की गई थी, बल्कि कूटरचित तरीके से बनाई गई थी। मामले के सामने आने पर विधिवत जांच करवाई गई, और जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेज़ों एवं साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोप साबित किए।
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'आरोपी ने जानबूझकर तैयार करवाया फर्जी रिजल्ट'
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी प्रमाण और तकनीकी रिपोर्ट अदालत में पेश किए। जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने जानबूझकर फर्जी रिजल्ट तैयार करवाया और उसे चुनाव नामांकन प्रक्रिया में इस्तेमाल किया। लोक अभियोजक देवेंद्र कुमार ने बताया कि अदालत ने माना कि यह कृत्य केवल दस्तावेज़ी अपराध नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास था।
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'लोकतंत्र के साथ हुआ सीधा छल'
एसीजेएम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि चुनावी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि लोकतंत्र के साथ सीधा छल है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में कठोर दंड नहीं दिया गया, तो भविष्य में लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जनप्रतिनिधि बनने का प्रयास करेंगे। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जनप्रतिनिधि बनने के लिए ईमानदारी और पारदर्शिता अनिवार्य हैं।