Rajasthan: जीते जी नहीं मिली मनचाही पोस्टिंग, मौत के बाद जारी हुआ तबादला आदेश; लापरवाही से मचा हड़कंप
बीकानेर में शिक्षा विभाग की तबादला सूची में 30 जून को आत्महत्या कर चुके शिक्षक गणेश प्रकाश जोहिया का नाम शामिल होने से विवाद खड़ा हो गया। वर्षों तक तबादला नहीं मिलने के बाद निधन उपरांत आदेश जारी होने पर विभागीय लापरवाही और रिकॉर्ड सत्यापन पर सवाल उठे।
बीकानेर में शिक्षा विभाग की तबादला सूची में 30 जून को आत्महत्या कर चुके शिक्षक गणेश प्रकाश जोहिया का नाम शामिल होने से विवाद खड़ा हो गया। वर्षों तक तबादला नहीं मिलने के बाद निधन उपरांत आदेश जारी होने पर विभागीय लापरवाही और रिकॉर्ड सत्यापन पर सवाल उठे।
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शिक्षा विभाग की हाल ही में जारी तबादला सूची एक बार फिर चर्चा और सवालों के घेरे में है। इस बार कारण एक ऐसी प्रशासनिक चूक बनी है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची में एक ऐसे शिक्षक का नाम स्थानांतरण के लिए शामिल कर दिया गया, जिनका करीब दो सप्ताह पहले ही निधन हो चुका था।
जानकारी के अनुसार उदरासर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पिछले 18 वर्षों से कार्यरत शिक्षक गणेश प्रकाश जोहिया लंबे समय से अपने गृह क्षेत्र के नजदीक तबादले की मांग कर रहे थे। उन्होंने कई बार विभाग और जनप्रतिनिधियों को प्रार्थना-पत्र देकर अपनी इच्छा जताई, लेकिन उनकी मांग पर कोई निर्णय नहीं हो सका।
दुखद पहलू यह रहा कि 30 जून 2026 को गणेश प्रकाश जोहिया ने उदरासर उपस्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित अपने आवासीय कक्ष में आत्महत्या कर ली। उनकी मौत से परिवार, सहकर्मियों और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई थी। मामला अभी लोगों की स्मृतियों में ताजा ही था कि शिक्षा विभाग की नई तबादला सूची में उनका नाम सामने आ गया।
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जारी सूची के अनुसार जोहिया का तबादला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देवीकुंड सागर किया गया है। सूची सार्वजनिक होते ही लोगों में हैरानी फैल गई। सवाल उठने लगे कि जिस शिक्षक को जीवित रहते वर्षों तक मनचाही पोस्टिंग नहीं मिल सकी, उसका तबादला निधन के बाद कैसे कर दिया गया।
ग्रामीणों, परिजनों और सहकर्मियों का कहना है कि यदि विभाग ने समय रहते उनकी मांग पर विचार किया होता तो शायद परिस्थितियां अलग होतीं। वहीं इस घटनाक्रम ने विभागीय रिकॉर्ड अपडेट करने और स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि तबादला आदेश जारी करने से पहले कर्मचारियों के सेवा अभिलेख और वर्तमान स्थिति का सत्यापन किया जाना चाहिए। मृत शिक्षक के नाम जारी हुआ तबादला आदेश अब पूरे शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।