Rajasthan: उद्घाटन से पहले ग्रिड परिसर बना मासूम की मौत का कारण, करंट लगने से 4 साल के बच्चे की गई जान
Rajasthan News: बूंदी के केशवरायपाटन में नवनिर्मित विद्युत ग्रिड परिसर में करंट लगने से चार वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव रखकर करीब पांच घंटे तक धरना दिया। ठेकेदार द्वारा 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का आश्वासन दिए जाने के बाद धरना समाप्त हुआ। प्रारंभिक जांच में ठेकेदार की लापरवाही की आशंका जताई गई है।
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बूंदी जिले के केशवरायपाटन क्षेत्र में नवनिर्मित विद्युत ग्रिड परिसर में करंट लगने से चार वर्षीय बच्चे की मौत के बाद माहौल गम और आक्रोश से भर गया। मासूम की मौत से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने शव को विद्युत ग्रिड के मुख्य द्वार पर रखकर धरना शुरू कर दिया। बिलखती मां बेटे के शव को गोद में लेकर घंटों तक न्याय की गुहार लगाती रही। कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग को लेकर करीब पांच घंटे तक धरना जारी रहा। देर रात पुलिस, उद्योग विभाग और विद्युत विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में हुई समझाइश के बाद ठेकेदार ने निजी स्तर पर 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन धरना समाप्त करने पर राजी हुए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
निर्माण कार्य के दौरान हुआ दर्दनाक हादसा
केशवरायपाटन थाने के सहायक उपनिरीक्षक हरिशंकर शर्मा ने बताया कि गांव में हाल ही में विद्युत ग्रिड का निर्माण कार्य पूरा हुआ था, जबकि कुछ सिविल कार्य अभी भी ठेकेदार के माध्यम से चल रहा था। गुरुवार को ठेकेदार के मजदूर परिसर में काम कर रहे थे। मजदूर विक्रम बंजारा का चार वर्षीय पुत्र आशिक अपनी मां के साथ मौके पर मौजूद था। खेलते-खेलते वह करंट की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
अधिकारियों की देरी से बढ़ा ग्रामीणों का आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण ग्रिड परिसर पहुंच गए। ग्रामीणों का आरोप था कि सूचना देने के बावजूद विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे लोगों का गुस्सा बढ़ गया। पूर्व सरपंच भेरूलाल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने शव को ग्रिड के मुख्य द्वार पर रखकर धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
10 लाख सहायता के आश्वासन पर खत्म हुआ धरना
देर रात तक पुलिस, उद्योग विभाग, विद्युत विभाग के अधिकारियों, ग्रामीणों और परिजनों के बीच वार्ता चली। अंततः ठेकेदार ने निजी स्तर पर 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन धरना समाप्त करने पर राजी हो गए। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया।
प्रारंभिक जांच में ठेकेदार की लापरवाही की आशंका
विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता जे.के. अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रथम दृष्टया हादसा विभाग की बजाय ठेकेदार की लापरवाही का परिणाम प्रतीत हो रहा है। उनके अनुसार ग्रिड का मुख्य कार्य पूरा हो चुका था और केवल सिविल कार्य शेष था। मजदूरों के लिए डाली गई अस्थायी बिजली की तार बीच से कटी हुई थी। आशंका है कि उसी तार के संपर्क में आने से मासूम की मौत हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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उद्घाटन से पहले मातम में बदला जश्न
ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत ग्रिड का जल्द उद्घाटन होना था, लेकिन उससे पहले ही सुरक्षा में कथित लापरवाही ने एक मासूम की जान ले ली। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।