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Bundi News: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, भामाशाह मंडी का विस्तार तय, जाम और इंतजार से मिलेगी राहत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बूंदी Published by: बूँदी ब्यूरो Updated Wed, 18 Mar 2026 10:04 PM IST
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सार

हाड़ौती के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जहां वर्षों से लंबित भामाशाह मंडी विस्तार को आखिरकार मंजूरी मिल गई। इस फैसले से न केवल व्यापार सुगम होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

Bundi: Big relief for farmers as Bhamashah Mandi expansion approved, traffic congestion and long waits to ease
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विस्तार

देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित इस परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में खुशी की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों से मिली इस मंजूरी से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
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मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।
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जाम और लंबी कतारों से मिलेगी राहत
भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी किसान अपनी उपज बेचने आते हैं। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। साथ ही पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय उपज खराब होने का खतरा बना रहता है।

विस्तार के बाद मंडी का कारोबार कई गुना बढ़ने की संभावना है। राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से सीधी कनेक्टिविटी मिलने से जाम की समस्या कम होगी और किसानों को उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

वर्षों से अटका था मामला
मंडी से जुड़ी वन भूमि के कारण यह मामला लंबे समय से लंबित था। बाद में वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किलोमीटर तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के चलते यह फिर अटक गया। दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियमों में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (CEC) में आवेदन किया गया।

समिति ने वर्ष 2007 में कोटा बाईपास निर्माण के दौरान तय ग्रीन बेल्ट से संबंधित शर्तों में संशोधन करते हुए स्वीकृति प्रदान की, जिससे करीब 96 हैक्टेयर भूमि के डायवर्जन का रास्ता साफ हो गया।

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11 साल पुराना सपना हुआ साकार
मंजूरी की सूचना मिलते ही कोटा सीड्स एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जश्न मनाया। एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी ने कहा कि 2015 से चल रहे प्रयास अब सफल हुए हैं और यह निर्णय हाड़ौती के अन्नदाताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

वर्तमान में मंडी में सालाना करीब 8 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस वे से जुड़ने के बाद, भविष्य में रेल और हवाई कनेक्टिविटी मिलने पर कारोबार 50 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही भामाशाह मंडी को विश्व के सबसे बड़े कृषि विपणन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में सड़क कार्यों को भी मंजूरी
बैठक में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से जुड़े दो सड़क कार्यों को भी पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंजूरी दी गई। मंडावरा-झाटौली सड़क (5.6 किमी) को कच्चे मार्ग से 3.75 मीटर चौड़ी पक्की सड़क में विकसित किया जाएगा। इसके लिए 1.3 हैक्टेयर वन भूमि और 3.135 हैक्टेयर गैर-वन भूमि का उपयोग होगा।

परियोजना लागत का 2% वन्यजीव संरक्षण, आवास सुधार और पुनर्वास पर खर्च किया जाएगा। साथ ही, वन्यजीवों के लिए एनिमल पास, 300-500 मीटर पर स्पीड ब्रेकर और संकेतक लगाए जाएंगे।

इसके अलावा SH-138 (रामेश्वर चौराहा–NH-148D) सड़क के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण को भी मंजूरी दी गई है। करीब 35.30 किमी लंबी इस परियोजना का एक हिस्सा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में आता है। इसके तहत 13.92 हैक्टेयर भूमि का उपयोग होगा और 50 हैक्टेयर में पौधारोपण, 5 सोलर जल स्रोत तथा 40 हेक्टेयर में आक्रामक प्रजातियों के उन्मूलन की शर्तें रखी गई हैं।

भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल व्यापार सुगम होगा, बल्कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में यह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल हो सकती है।

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