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Chittorgarh News: प्रसूता-नवजात की मौत के बाद डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप, हत्या का मामला दर्ज करने की मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 27 May 2025 10:43 PM IST
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सार
Chittorgarh News: चित्तौड़गढ़ में प्रसव के दौरान प्रसूता-नवजात की मौत हो गई, जिसके बाद मृतका के परिजन डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा करने लगे। उन्होंने हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।
चित्तौड़गढ़ के जिला चिकित्सालय में प्रसूता एवं नवजात की मौत के बाद परिजन जिला चिकित्सालय पहुंचे
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विस्तार
चित्तौड़गढ़ के जिला मुख्यालय पर स्थित महिला एवं बाल चिकित्सालय में एक बार फिर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। सोमवार को भर्ती एक प्रसूता और उसके नवजात की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालना पड़ा।
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प्रसव के दौरान हुई मां और बच्चे की मौत
जानकारी के मुताबिक, सेगवा निवासी प्रीति कंडेरा को सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर महिला एवं बाल चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। प्रीति के पति नरेश कंडेरा ने बताया कि उनकी पत्नी को तेज प्रसव पीड़ा हो रही थी और उन्होंने चिकित्सक को बुलाने की बार-बार गुहार लगाई। लेकिन परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक दिप्ती श्रीवास्तव दो घंटे तक मौके पर नहीं पहुंची। इस देरी के कारण पहले पेट में ही बच्चे की मौत हो गई और थोड़ी देर बाद प्रसूता प्रीति ने भी दम तोड़ दिया। इस दुखद घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में लोग जिला अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अस्पताल में पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
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परिजनों का हंगामा, प्रशासन ने संभाली स्थिति
हंगामे की सूचना मिलते ही अतिरिक्त कलेक्टर विनोद मल्हौत्रा, उपखंड अधिकारी पंकज बड़गुर्जर, पुलिस उपाधीक्षक विनय चौधरी, सदर और कोतवाली थानाधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत करने की कोशिश की। परिजनों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए चिकित्सक दिप्ती श्रीवास्तव और अन्य नर्सिंग कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। नरेश कंडेरा ने सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई और चित्तौड़गढ़ प्रशासन को भी इस मामले में अपनी बात रखी। जिला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमओ और सीएमएचओ को कलेक्ट्रेट कार्यालय में तलब किया और आवश्यक निर्देश दिए।
हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग
परिजनों ने चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय पर चिकित्सक मौके पर पहुंचती, तो शायद मां और बच्चे की जान बच सकती थी। उन्होंने चिकित्सक दिप्ती श्रीवास्तव और संबंधित नर्सिंग कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सक को तत्काल निलंबित करने की भी मांग रखी। परिजनों का गुस्सा इस बात को लेकर भी था कि प्रसूता की मौत के बाद भी अस्पताल ने उनसे ब्लड यूनिट मंगवाई, जबकि उस समय तक प्रीति की मौत हो चुकी थी। इस मामले में परिजनों ने मुआवजे की भी मांग की। गौरतलब है कि इससे पहले भी इस चिकित्सालय में प्रसूताओं की मौत के तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिनकी जांच अभी तक चल रही है।
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मेडिकल बोर्ड गठित कर किया गया पोस्टमार्टम
हंगामे को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों से चर्चा की और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बाहर से चिकित्सकों को बुलाकर एक मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्णय लिया। इसके बाद चित्तौड़गढ़ चिकित्सालय से अलग, अन्य स्थानों से तीन चिकित्सकों का बोर्ड बनाया गया और प्रसूता और नवजात का पोस्टमार्टम करवाया गया। जिला कलेक्टर ने इस मामले में विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने एक बार फिर जिला चिकित्सालय की लचर व्यवस्था को उजागर किया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग को तेज कर दिया है।