राजस्थान राज्यसभा चुनाव: भाजपा में महिला कार्ड और 'बिट्टू बनाम पूनिया' की रेस, कांग्रेस में खेड़ा का नाम आगे
राजस्थान की तीन राज्यसभा सीट लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गईं हैं। भाजपा से अलका गुर्जर का नाम मजबूत माना जा रहा है, जबकि दूसरी सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू और सतीश पूनिया चर्चा में हैं। इधर, कांग्रेस से पवन खेड़ा समेत अन्य दिग्गज रेस में हैं।
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राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। हालांकि राजनीतिक गलियारों में नामों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और माना जा रहा है कि अगले दो-तीन दिनों में दोनों दल अपने पत्ते खोल सकते हैं। मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है।
महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देगी भाजपा
भाजपा खेमे में इस बार एक सीट पर महिला खेमे को जाती नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अल्का गुर्जर का नाम तय हो गया है। वे मौजूदा समय में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में काम कर रही है।दूसरी सीट के लिए केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं। बिट्टू का वर्तमान कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है और केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं संगठन और जाट राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले सतीश पूनिया भी दावेदारी में पीछे नहीं माने जा रहे हैं।
अन्य संभावित नामों पर भी चर्चा
हालांकि, भाजपा के अन्य संभावित नामों में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर, महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ और ज्योति मिर्धा के नाम भी चर्चा में रहे। लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि दो सीटों के लिए रवनीत सिंह बिट्टू, सतीश पूनिया और अल्का गुर्जर के बीच फाइनल मुकाबला है। अगर रवनीत बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा नहीं जाते हैं तो उन्हें गुजरात से राज्यसभा भेजा जा सकता है।
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कांग्रेस के खाते में जाएगी एक सीट
कांग्रेस के खाते में एक सीट जाने की संभावना के बीच राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। इसके अलावा भंवर जितेंद्र सिंह, धीरज गुर्जर और मौजूदा सांसद नीरज डांगी भी संभावित दावेदारों में शामिल हैं। कांग्रेस नेतृत्व स्थानीय गुटबाजी से बचने के लिए किसी राष्ट्रीय चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति पर भी विचार कर सकता है।
1952 से अब तक केवल नौ महिलाएं ही पहुंची राज्यसभा
इस चुनाव की एक खास बात महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी है। राजस्थान से 1952 से अब तक केवल नौ महिलाएं ही राज्यसभा पहुंच सकी हैं। वर्तमान में प्रदेश के 10 राज्यसभा सांसदों में सिर्फ सोनिया गांधी ही महिला सदस्य हैं। ऐसे में यदि भाजपा अलका गुर्जर या किसी अन्य महिला नेता को उम्मीदवार बनाती है तो यह चुनाव का बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव सिर्फ संख्या बल का गणित नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और 2028 विधानसभा तथा 2029 लोकसभा चुनाव की रणनीति का भी संकेत देगा। अब सबकी नजर भाजपा और कांग्रेस की अंतिम सूची पर टिकी हुई है, जो राजस्थान की राजनीति के अगले समीकरण तय कर सकती है।
जून 2026 में ये सीटें होंगी खाली
- नीरज डांगी (कांग्रेस)
- राजेंद्र गहलोत (भाजपा)
- रवनीत सिंह बिट्टू (भाजपा)
इन तीन सीटों पर चुनाव के बाद भी मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा के खाते में दो और कांग्रेस के खाते में एक सीट जाने की संभावना मानी जा रही है।