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राजस्थान हाईप्रोफाइल हनीट्रैप केस: आरोपी युवती को हाईकोर्ट से जमानत, जेल में पहुंचे फर्जी वकीलों की जांच शुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 11:46 AM IST
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सार
राजस्थान के चर्चित कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग मामले में आरोपी युवती को हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद केस एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अदालत ने सशर्त जमानत मंजूर की है, जबकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच जेल में युवती से मिलने पहुंचे दो लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के बहुचर्चित हाईप्रोफाइल ब्लैकमेलिंग और कथित हनीट्रैप मामले में आरोपी युवती को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति बिपिन गुप्ता की विशेष अवकाशकालीन पीठ ने सुनवाई के बाद युवती को नियमित जमानत प्रदान करते हुए एक लाख रुपये के निजी मुचलके और 50-50 हजार रुपये की दो जमानतों पर रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने शर्त रखी है कि आरोपी बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेगी, किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेगी और नियमित रूप से न्यायालय में उपस्थित रहेगी।
ब्लैकमेलिंग से जुड़ा है मामला
सुनवाई के दौरान युवती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश गुप्ता ने पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि यह मामला ब्लैकमेलिंग से अधिक प्रेम संबंधों, आर्थिक लेन-देन और कथित धोखे से जुड़ा है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि शिकायतकर्ता कारोबारी ने स्वयं को अविवाहित बताकर युवती के साथ संबंध बनाए और लंबे समय तक विवाह का आश्वासन देता रहा। युवती ने आरोप लगाया कि उसका वर्षों तक यौन शोषण किया गया तथा उस पर कई बार गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया।
राशि वापस मांगने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ
बचाव पक्ष के अनुसार युवती ने कारोबारी की आर्थिक मदद के लिए करीब 10.5 लाख रुपये का बैंक ऋण भी लिया था। बाद में राशि वापस मांगने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। साथ ही पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और फॉरेंसिक जांच की अनदेखी का आरोप लगाया गया।
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90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं
दूसरी ओर शिकायतकर्ता कारोबारी ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि युवती और उसके सहयोगियों ने उसे ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये की मांग की। कारोबारी का दावा है कि उससे लगभग 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं और उसके परिवार की सुरक्षा को भी खतरा है।
ये भी पढ़ें- HPCL Rajasthan Refinery: रिफाइनरी से हर साल मिलेगा 40 लाख टन डीजल और 10 लाख टन पेट्रोल , ट्रायल रन इसी सप्ताह
दो लोगों की भूमिका जांच के दायरे
इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब युवती से जेल में मिलने पहुंचे दो लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई। पुलिस द्वारा जेल प्रशासन से मांगी गई रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि 12 जून को दो अधिवक्ता युवती से मिलने पहुंचे थे। जेल प्रशासन के अनुसार युवती द्वारा विरोध जताने पर दोनों को कुछ ही मिनटों में बाहर कर दिया गया। युवती के परिवार ने आरोप लगाया है कि ये लोग समझौते का दबाव बनाने के उद्देश्य से जेल पहुंचे थे। इन आरोपों के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अब इस चर्चित मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही और जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।
ब्लैकमेलिंग से जुड़ा है मामला
सुनवाई के दौरान युवती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश गुप्ता ने पूरे मामले को एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि यह मामला ब्लैकमेलिंग से अधिक प्रेम संबंधों, आर्थिक लेन-देन और कथित धोखे से जुड़ा है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि शिकायतकर्ता कारोबारी ने स्वयं को अविवाहित बताकर युवती के साथ संबंध बनाए और लंबे समय तक विवाह का आश्वासन देता रहा। युवती ने आरोप लगाया कि उसका वर्षों तक यौन शोषण किया गया तथा उस पर कई बार गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया।
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राशि वापस मांगने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ
बचाव पक्ष के अनुसार युवती ने कारोबारी की आर्थिक मदद के लिए करीब 10.5 लाख रुपये का बैंक ऋण भी लिया था। बाद में राशि वापस मांगने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। साथ ही पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और फॉरेंसिक जांच की अनदेखी का आरोप लगाया गया।
90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं
दूसरी ओर शिकायतकर्ता कारोबारी ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि युवती और उसके सहयोगियों ने उसे ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपये की मांग की। कारोबारी का दावा है कि उससे लगभग 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं और उसके परिवार की सुरक्षा को भी खतरा है।
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दो लोगों की भूमिका जांच के दायरे
इसी बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब युवती से जेल में मिलने पहुंचे दो लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई। पुलिस द्वारा जेल प्रशासन से मांगी गई रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि 12 जून को दो अधिवक्ता युवती से मिलने पहुंचे थे। जेल प्रशासन के अनुसार युवती द्वारा विरोध जताने पर दोनों को कुछ ही मिनटों में बाहर कर दिया गया। युवती के परिवार ने आरोप लगाया है कि ये लोग समझौते का दबाव बनाने के उद्देश्य से जेल पहुंचे थे। इन आरोपों के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अब इस चर्चित मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही और जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं।