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Rajasthan: फर्जी सर्टिफिकेट से करोड़ों के टेंडर हासिल करने का आरोप, जल जीवन मिशन घोटाले में ACB का बड़ा एक्शन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जयपुर ब्यूरो Updated Tue, 12 May 2026 07:54 AM IST
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सार

 Jaipur: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी की एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है। जांच में फर्जी प्रमाण पत्र, टेंडर पूलिंग, रिश्वत और 20 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।

Jal Jeevan Mission Scam Mahesh Joshi Associate Sanjay Badaya Arrested Probe Intensifies 20,000 Crore Tenders
गिरफ्तार आरोपी संजय बड़ाया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत हुए कथित हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया है। एसीबी में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 में संजय बड़ाया के खिलाफ पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। थाईलैंड यात्रा से लौटने पर उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर डिटेन किया गया, जिसके बाद एसीबी की टीम उसे जयपुर लेकर आई। न्यायालय में पेश करने के बाद अदालत ने उसे 13 मई 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।


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न्यायिक हिरासत में भेजे गए पूर्व मंत्री महेश जोशी 
इसी मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को भी अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एसीबी के अनुसार मामले की जांच लगातार जारी है और पूछताछ में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ रहे हैं।
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फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए हासिल किए गए टेंडर
जांच में सामने आया कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवैल कम्पनी और श्री श्याम ट्यूबवैल कम्पनी ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कर पीएचईडी के विभिन्न टेंडरों में भाग लिया। आरोप है कि तत्कालीन मंत्री महेश जोशी, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल, विभागीय अधिकारियों, ठेकेदारों और निजी व्यक्तियों ने मिलीभगत कर करीब 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए।

नियम बदलकर टेंडर पूलिंग को बढ़ावा देने का आरोप
एसआईटी जांच में यह भी सामने आया कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के मेजर प्रोजेक्ट्स में नियमों के विपरीत साइट विजिट प्रमाण पत्र की अनिवार्यता जोड़ दी गई। इससे बोलीदाताओं की पहचान उजागर हुई और कथित टेंडर पूलिंग को बढ़ावा मिला। आरोप है कि इसी कारण 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक प्रीमियम पर टेंडर स्वीकृत किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इन परियोजनाओं की कुल राशि लगभग 20 हजार करोड़ रुपये है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग और रिश्वत लेनदेन के आरोप
एसीबी का दावा है कि संजय बड़ाया तत्कालीन मंत्री महेश जोशी का करीबी था और विभागीय कार्यों में उसका प्रभाव था। जांच में ट्रांसफर-पोस्टिंग, विभागीय दबाव और रिश्वत लेनदेन से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं।

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अब तक 12 गिरफ्तार, तीन आरोपी फरार
इस मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किए गए हैं। एडीजी स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में गठित एसआईटी मामले की तकनीकी और दस्तावेजी जांच कर रही है।

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