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Rahul Gandhi: मंच पर चली राहुल की ‘पॉलिटिकल ड्रामा क्लास’, बोले- कांग्रेस में नहीं चलेगी चाटुकारिता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Mon, 01 Jun 2026 05:28 PM IST
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सार

पुष्कर में कांग्रेस के चिंतन शिविर के समापन सत्र में राहुल गांधी ने नाटकीय प्रस्तुति के जरिए जिलाध्यक्षों को संगठन का पाठ पढ़ाया। डोटासरा को मंच पर उदाहरण बनाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में चाटुकारिता नहीं, बल्कि तपस्या, त्याग और प्रदर्शन से पहचान मिलती है।

Rahul’s Political Theatre in Pushkar: ‘Hard Work, Not Flattery, Earns You a Place in Congress’
राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 

कांग्रेस के 10 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन एवं प्रशिक्षण शिविर के समापन सत्र में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जिला कांग्रेस अध्यक्षों को संगठन की मूल विचारधारा, टीम वर्क और जनसरोकारों पर आधारित राजनीति का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि कांग्रेस में आगे बढ़ने का रास्ता चाटुकारिता नहीं, बल्कि तपस्या, त्याग और कठोर परिश्रम से होकर जाता है।

राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी गरीब, वंचित या कमजोर व्यक्ति के साथ अन्याय होता है तो कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता, जिला अध्यक्ष और नेता उसके साथ खड़ा दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति सत्ता नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए संघर्ष करने की राजनीति है।

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धर्म और सामाजिक सौहार्द पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हर इंसान का शरीर पंचतत्वों से बना है। चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, सभी की मूल संरचना एक जैसी है। ऐसे में समाज को धर्म और जाति के आधार पर बांटने की राजनीति से बचना चाहिए।

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टीम वर्क पर दिया जोर

राहुल गांधी ने संगठन में बेहतर समन्वय और टीम वर्क को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को सामूहिक भावना के साथ काम करना होगा। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर संगठन को प्राथमिकता देना जरूरी है।

नाटक के जरिए समझाया कांग्रेस और भाजपा का फर्क

सत्र के दौरान राहुल गांधी ने एक रोचक नाट्य प्रस्तुति के जरिए कार्यकर्ताओं को संदेश दिया। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को मंच पर कुर्सी पर खड़ा किया और कुछ नेताओं को बुलाकर अलग-अलग भूमिकाएं निभाने को कहा। किसी से हाथ जोड़कर खड़े होने को कहा गया, किसी से दंडवत प्रणाम करवाया गया, जबकि वरिष्ठ नेता रामलाल जाट को कुर्सी खींचने की भूमिका दी गई।

इस उदाहरण के माध्यम से राहुल गांधी ने बताया कि कुछ राजनीतिक दलों में पद पाने के लिए नेताओं की परिक्रमा और खुशामद की संस्कृति होती है, लेकिन कांग्रेस की कार्यशैली इससे अलग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में टिकट या पद पाने के लिए किसी नेता की परिक्रमा लगाने की जरूरत नहीं है।
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जय शाह और विराट कोहली का उदाहरण

राहुल गांधी ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि कुछ लोग पारिवारिक या राजनीतिक प्रभाव के कारण आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन वास्तविक सम्मान और सफलता मेहनत तथा तपस्या से मिलती है। उन्होंने क्रिकेटर विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत, अनुशासन और तपस्या से अपनी पहचान बनाई है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि कांग्रेस का संस्कार त्याग, संघर्ष और सेवा का है। जो व्यक्ति मेहनत करेगा, जनता के बीच रहेगा और संगठन के लिए काम करेगा, वही आगे बढ़ेगा।

जूली-डोटासरा की खुलकर तारीफ की
राहुल गांधी ने राजस्थान कांग्रेस नेतृत्व की खुलकर सराहना की। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच बेहतर समन्वय की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं का तालमेल संगठन के लिए सकारात्मक संदेश देता है। राहुल ने कहा कि राजस्थान का यह मॉडल कांग्रेस के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा और उदाहरण बन सकता है।

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