Rajasthan News: बजट खर्च में सुस्ती पर वित्त विभाग सख्त, कहा- बजट नियमों की नहीं हो रही पालना
राजस्थान सरकार ने सभी विभागों को वित्तीय अनुशासन के निर्देश दिए हैं। मार्च में अनावश्यक खर्च और पीडी खातों में राशि हस्तांतरण पर रोक लगाते हुए पूरे वर्ष समान बजट व्यय सुनिश्चित करने को कहा है।
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चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही बीतने के बाद राजस्थान सरकार में विभागों के बजट खर्च के पैटर्न को लेकर चिंता दिखाई देने लगी है। पहली तिमाही में बजट खर्च की रफ्तार बेहद कम रही है। सीएजी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जून के बीच सरकार का कुल बजट खर्च अपेक्षाकृत धीमा रहा है।
राजस्व व्यय में कुल बजट का 19.74 प्रतिशत ही खर्च हुआ है, जबकि सड़क, भवन, सिंचाई और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं से जुड़े पूंजीगत व्यय में केवल 14.50 प्रतिशत राशि खर्च हो सकी है। यानी विकास कार्यों पर खर्च की रफ्तार अभी भी उम्मीद से कम है।
आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने पहली तिमाही में कुल बजट का 18.73 प्रतिशत खर्च किया है। खर्च के पेटर्न पर चिंता जताते हुए वित्त विभाग ने सभी विभागों को परिपत्र जारी कर कहा कि बजट की राशि सही समय पर खर्च की जाए। हर महीने व्यय की समीक्षा हो, जरूरत के अनुसार ही अनुपूरक बजट मांगा जाए और अनावश्यक पुनर्विनियोजन से बचा जाए। जिन मदों में राशि खर्च नहीं होनी है, उसे समय रहते सरेंडर किया जाए, ताकि अंतिम समय में बजट समायोजन की नौबत न आए।
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'बजट मेन्युअल की पालना नहीं कर रहे विभाग'
वित्त विभाग ने अपने परिपत्र में कहा है कि कई विभाग बजट के नियमों की पलना नहीं कर रहे हैं। विभाग गैर जरूरी रूप से अनुपूरक अनुदान स्वीकृत करवा रहे हैं लेकिन उनका वास्तविक खर्च स्वीकृत करवाए गए मूल बजट से भी कम रही है। वित्त विभाग ने यह भी कहा कि कई विभाग बजट पूरा करने के लिए वर्ष की आखिरी तिमाही में एक साथ पैसा खर्च करते हैं।
सीएजी की रिपोर्ट ने बढ़ाई सरकार की चिंता
वित्त विभाग ने परिपत्र में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्टों का भी हवाला दिया है। सीएजी पिछले कई वर्षों से यह टिप्पणी करता रहा है कि कई विभाग सालभर खर्च नहीं करते और मार्च में अचानक बड़ी राशि खर्च कर देते हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा अनुपूरक बजट, अनावश्यक पुनर्विनियोजन और बड़ी राशि खर्च किए बिना छोड़ देने जैसी वित्तीय अनियमितताएं भी लगातार सामने आती रही हैं।
पीडी खातों पर भी सख्ती
सीएजी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि विभागों के पीडी खातों में राशि पड़ी रह जाती है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि बिना आवश्यकता निजी निक्षेप (पीडी) खातों में राशि जमा न कराई जाए। साथ ही बजट नियमावली के सभी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता की गुंजाइश न रहे।