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Rajasthan: 2018 से 2022 के बीच हुई भर्तियों की CBI जांच की मांग, छात्र नेता ने सरकार को दिया अल्टीमेटम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 04:28 PM IST
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सार
Rajasthan: राजस्थान की सरकारी भर्तियों में कथित घोटालों, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर छात्र नेता लादूराम गोदारा ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने 2018 से 2022 तक की सभी भर्तियों की सीबीआई जांच, पीटीआई और रीट-2021 की जांच तथा भर्ती बोर्डों में सुधार की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
छात्र नेता लादूराम गोदारा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और कथित घोटालों को लेकर युवा छात्र नेता लादूराम गोदारा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 2025 तक लगभग हर बड़ी भर्ती परीक्षा किसी न किसी विवाद में घिरी रही है, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। गोदारा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
बड़े स्तर पर हुआ घोटाला: लादूराम
लादूराम गोदारा ने मांग की कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच हुई सभी सरकारी भर्तियों की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती परीक्षा में भी बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है, लेकिन अब तक इसकी गंभीर जांच नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
पीटीआई भर्ती की तत्काल जांच की मांग
पीटीआई (फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर) भर्ती परीक्षा को लेकर भी गोदारा ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दो ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र सार्वजनिक किए, जिनकी नियुक्ति हो चुकी है। गोदारा का दावा है कि नौकरी लगने के बाद उनके आवेदन फॉर्म में संशोधन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि चयन के बाद फॉर्म संपादन की अनुमति कैसे दी गई और इसके पीछे क्या कारण रहे। एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक अभ्यर्थी ने फॉर्म भरते समय जिस विश्वविद्यालय का उल्लेख किया था, दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसे बदल दिया गया। गोदारा ने इसे साजिश और घोटाले की ओर इशारा बताते हुए पीटीआई भर्ती की तत्काल जांच की मांग की।
भाजपा ने पूरा नहीं किया वादा
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन सरकार बनने के बाद भी वर्ष 2018 से 2022 तक की भर्तियों की सीबीआई जांच नहीं कराई गई। इससे प्रदेश के युवाओं में गहरी निराशा है।
ये भी पढ़ें: कांडला से कलकत्ता जा रहे ट्रक में लगी आग, 25 मिनट की मशक्कत के बाद पाया गया काबू
अधिकारियों से नहीं हुई पूछताछ
गोदारा ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तत्कालीन अध्यक्ष बी.एल. जारावत और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व अध्यक्ष संजय क्षोत्रिय सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब तक न तो इन अधिकारियों से पूछताछ की गई है और न ही इनके नाम स्पष्ट रूप से एफआईआर में सामने आए हैं। इसके अलावा, रीट-2021 (लेवल-1) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की भी अब तक समुचित जांच नहीं कराई गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती बोर्डों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर सचिव स्तर तक कई अधिकारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिनका न तो स्थानांतरण किया गया और न ही जांच हुई। हालिया परीक्षाओं में असामान्य रूप से ऊंचे कट-ऑफ ने भी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।
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बड़े स्तर पर हुआ घोटाला: लादूराम
लादूराम गोदारा ने मांग की कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच हुई सभी सरकारी भर्तियों की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती परीक्षा में भी बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है, लेकिन अब तक इसकी गंभीर जांच नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
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पीटीआई भर्ती की तत्काल जांच की मांग
पीटीआई (फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर) भर्ती परीक्षा को लेकर भी गोदारा ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दो ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र सार्वजनिक किए, जिनकी नियुक्ति हो चुकी है। गोदारा का दावा है कि नौकरी लगने के बाद उनके आवेदन फॉर्म में संशोधन किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि चयन के बाद फॉर्म संपादन की अनुमति कैसे दी गई और इसके पीछे क्या कारण रहे। एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक अभ्यर्थी ने फॉर्म भरते समय जिस विश्वविद्यालय का उल्लेख किया था, दस्तावेज सत्यापन के दौरान उसे बदल दिया गया। गोदारा ने इसे साजिश और घोटाले की ओर इशारा बताते हुए पीटीआई भर्ती की तत्काल जांच की मांग की।
भाजपा ने पूरा नहीं किया वादा
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि पेपर लीक और भर्ती घोटालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन सरकार बनने के बाद भी वर्ष 2018 से 2022 तक की भर्तियों की सीबीआई जांच नहीं कराई गई। इससे प्रदेश के युवाओं में गहरी निराशा है।
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अधिकारियों से नहीं हुई पूछताछ
गोदारा ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तत्कालीन अध्यक्ष बी.एल. जारावत और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व अध्यक्ष संजय क्षोत्रिय सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब तक न तो इन अधिकारियों से पूछताछ की गई है और न ही इनके नाम स्पष्ट रूप से एफआईआर में सामने आए हैं। इसके अलावा, रीट-2021 (लेवल-1) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा की भी अब तक समुचित जांच नहीं कराई गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती बोर्डों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर सचिव स्तर तक कई अधिकारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हुए हैं, जिनका न तो स्थानांतरण किया गया और न ही जांच हुई। हालिया परीक्षाओं में असामान्य रूप से ऊंचे कट-ऑफ ने भी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।