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Jhunjhunu: सार्जेंट सुरेंद्र मोगा को मिली आधिकारिक शहीद की मान्यता, राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल में दर्ज हुआ नाम

Sat, 27 Jun 2026 09:58 PM IST
झुंझुनू ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनूं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनूं Published by: झुंझुनू ब्यूरो Updated Sat, 27 Jun 2026 09:58 PM IST
सार

झुंझुनूं के मेहरादासी गांव निवासी भारतीय वायुसेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा को भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का शहीद घोषित कर दिया है। उनका नाम राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल में अंकित किया गया है और उन्हें मरणोपरांत वायु सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया है।

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A salute from the nation to martyr Surendra Moga of Jhunjhunu, whose name is now inscribed in the War Memorial
झुंझुनूं के शहीद सुरेंद्र मोगा का वॉर मेमोरियल में अंकित हुआ नाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वीरों की धरती झुंझुनूं के मेहरादासी गांव के लाल सार्जेंट सुरेंद्र कुमार मोगा की शहादत को आखिरकार वह राष्ट्रीय सम्मान मिल गया, जिसका इंतजार उनका परिवार और पूरा क्षेत्र पिछले एक वर्ष से कर रहा था। भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से उन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का शहीद मानते हुए उनके नाम को देश के वीर जवानों की सूची में शामिल कर लिया है। इतना ही नहीं, उनका नाम अब राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल में भी अंकित कर दिया गया है, जिससे उनकी वीरता हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो गई है।

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हवाई हमले में घायल होने के बाद हुए थे शहीद
सार्जेंट सुरेंद्र मोगा भारतीय वायुसेना की मेडिकल विंग में पिछले 14 वर्षों से सेवाएं दे रहे थे और जम्मू-कश्मीर के उधमपुर स्थित 39 विंग में मेडिकल असिस्टेंट सार्जेंट के पद पर तैनात थे। 9 मई 2025 को पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमले के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायल होने के बावजूद उन्होंने अपने साथियों की मदद और सैन्य दायित्वों का निर्वहन जारी रखा। उपचार के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की।
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परिवार ने मांगा था सिर्फ शहादत का सम्मान
हालांकि उनकी शहादत पर किसी को संदेह नहीं था, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में आधिकारिक मान्यता को लेकर लंबे समय तक असमंजस बना रहा। संसद में भी यह मुद्दा उठा और झुंझुनूं के सांसद बृजेंद्र ओला ने सरकार से जवाब मांगा। शहीद की पत्नी सीमा मोगा और परिवार ने बार-बार सिर्फ एक मांग रखी-'हमें मुआवजा नहीं, हमारे बेटे और पति की शहादत का सम्मान चाहिए।'
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वायुसेना प्रमुख ने दिया था भरोसा
इसके बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह स्वयं मेहरादासी गांव पहुंचे और परिवार को भरोसा दिलाया कि राष्ट्र अपने इस वीर सपूत को कभी नहीं भूलेगा। अब वही भरोसा सम्मान में बदल गया है। राष्ट्रपति द्वारा उन्हें मरणोपरांत ‘वायु सेना मेडल’ प्रदान किया गया, दिल्ली में एक सैन्य भवन का नाम ‘सुरेंद्र हॉल’ रखा गया और राष्ट्रीय वॉर मेमोरियल में उनका नाम दर्ज कर उन्हें अमर श्रद्धांजलि दी गई।


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पूरे झुंझुनूं को अपने वीर सपूत पर गर्व
शहीद सुरेंद्र मोगा अपने पीछे पत्नी सीमा, एक पुत्र और एक पुत्री को छोड़ गए हैं। उनका परिवार पीढ़ियों से देश सेवा से जुड़ा रहा है। आज मेहरादासी गांव ही नहीं, बल्कि पूरा झुंझुनूं इस बात पर गर्व कर रहा है कि उसकी मिट्टी का एक लाल अब आधिकारिक रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अमर नायकों में शामिल हो चुका है। यह सम्मान केवल एक सैनिक का नहीं, बल्कि उस त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का सम्मान है, जिसके बल पर देश की सीमाएं सुरक्षित हैं।

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