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Jhunjhunu News: भारी-भरकम बिल से परेशान डॉक्टर ने इच्छा मृत्यु की मांग की, बिजली विभाग ने संशोधित बिल भेजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझनू
Published by: झुंझुनू ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2024 08:36 AM IST
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सार
शहर के फिजियोथेरेपिस्ट ने कलेक्टर से इच्छा मृत्यु देने की मांग की है। चिकित्सक का कहना है कि घर में सोलर पैनल लगवाने के बावजूद बिजली विभाग लंबा-चौड़ा बिल भेज रहा है और शिकायत करने पर कनेक्शन काटने की धमकी दे रहा है। हालांकि बाद में विभाग ने उनके बिल में संशोधन कर दिया है।
निजी चिकित्सक की इच्छा मृत्यु की मांग
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विस्तार
शहर के वार्ड नंबर एक में रहने वाले एक निजी चिकित्सक ने जिला कलेक्टर से इच्छा मृत्यु देने की मांग की है। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मनीष कुमार सैनी की ओर से जिला कलेक्टर को दिए गए पत्र में लिखा है कि घर पर सोलर पैनल लगाने के बावजूद उन्हें हर महीने करीब 30 हजार रुपये के बिजली के बिल निगम की ओर से भेजे जा रहे हैं। निगम के एईएन, जेईएन और लाइनमैन जानबूझकर ऐसा कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। इससे वे मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं और उन्हें इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए।
डॉ. सैनी ने बताया कि उन्होंने सरकारी योजना के तहत 5 महीने पहले दस केवी का सोलर पैनल लगाया था। घर पर केवल वे खुद और उनकी पत्नी ही रहते हैं। बिजली खर्च नहीं होने के बावजूद लगातार विभाग द्वारा उन्हें भारी-भरकम बिल भेजा रहा है। 4 महीने में उन्होंने कई बार इस बारे में प्रार्थना पत्र दे दिया लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते हुए उन्हें कनेक्शन काट देने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है ताकि इस मानसिक प्रताड़ना से बच सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि ऐसा कुछ होता है तो उनकी मौत के जिम्मेदार राजस्थान सरकार, ऊर्जा मंत्री और झुंझुनू बिजली विभाग के सभी कर्मचारी होंगे।
इधर बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता महेश कुमार टीबड़ा का कहना है कि चिकित्सक के लोड बढ़वाने पर उनका मीटर बदला गया था, इसके बाद इन्होंने एक बिल जमा नहीं कराया, फिर दूसरा बिल आया तो वह 31 हजार रुपये हो गया। इसके बाद इन्होंने सोलर के लिए आवेदन किया तो फिर से मीटर बदला गया लेकिन यह विभाग के कंप्यूटर में फीड नहीं हुआ, इस पर एवरेज बिल जारी हो गया। इन्होंने सोलर पैनल भी नौ दिसंबर को ही लगाया है। उन्होंने कहा कि एवरेज बिल जारी होने से चिकित्सक एआरओ के पास गए होंगे, वहां पर इनकी क्या बात हुई यह मुझे पता नहीं है। मेरे पास फोन आने पर मैंने एईएन और एआरओ से इस बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बिल संशोधित कर दिया गया है। इस पर चिकित्सक को बुलाकर उन्हें संशोधित बिल दे दिया गया है।
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डॉ. सैनी ने बताया कि उन्होंने सरकारी योजना के तहत 5 महीने पहले दस केवी का सोलर पैनल लगाया था। घर पर केवल वे खुद और उनकी पत्नी ही रहते हैं। बिजली खर्च नहीं होने के बावजूद लगातार विभाग द्वारा उन्हें भारी-भरकम बिल भेजा रहा है। 4 महीने में उन्होंने कई बार इस बारे में प्रार्थना पत्र दे दिया लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते हुए उन्हें कनेक्शन काट देने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी है ताकि इस मानसिक प्रताड़ना से बच सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि यदि ऐसा कुछ होता है तो उनकी मौत के जिम्मेदार राजस्थान सरकार, ऊर्जा मंत्री और झुंझुनू बिजली विभाग के सभी कर्मचारी होंगे।
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इधर बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता महेश कुमार टीबड़ा का कहना है कि चिकित्सक के लोड बढ़वाने पर उनका मीटर बदला गया था, इसके बाद इन्होंने एक बिल जमा नहीं कराया, फिर दूसरा बिल आया तो वह 31 हजार रुपये हो गया। इसके बाद इन्होंने सोलर के लिए आवेदन किया तो फिर से मीटर बदला गया लेकिन यह विभाग के कंप्यूटर में फीड नहीं हुआ, इस पर एवरेज बिल जारी हो गया। इन्होंने सोलर पैनल भी नौ दिसंबर को ही लगाया है। उन्होंने कहा कि एवरेज बिल जारी होने से चिकित्सक एआरओ के पास गए होंगे, वहां पर इनकी क्या बात हुई यह मुझे पता नहीं है। मेरे पास फोन आने पर मैंने एईएन और एआरओ से इस बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि बिल संशोधित कर दिया गया है। इस पर चिकित्सक को बुलाकर उन्हें संशोधित बिल दे दिया गया है।

निजी चिकित्सक की इच्छा मृत्यु की मांग

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