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Jhunjhunu News : दिहाड़ी करने पर मजबूर हैं क्षेत्र के ग्रेजुएट्स, भ्रष्टाचार के दानव ने रोके विकास के रास्ते

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू Published by: झुंझुनू ब्यूरो Updated Mon, 11 Nov 2024 04:22 PM IST
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सार

उपचुनावों को महज अब एक ही दिन बाकी रह गया है। इसी बीच झुंझुनू विधानसभा के ग्रामीण इलाकों से खबर है कि इलाके के पढ़े-लिखे ग्रेजुएट रोजगार नहीं मिलने से दैनिक मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। पढ़िए अमर उजाला की खास पेशकश

Jhunjhunu News : Graduates of the area are forced to work as daily wages, corruption hinders development
झुंझुनू में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा
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विस्तार

उपचुनावों में प्रत्याशियों के तमाम दावों के बीच झुंझुनू के ग्रामीण इलाकों से खबर है कि रोजगार नहीं मिलने से युवा घयाड़ी मजदूरी व भेड़-बकरियां चराने को मजबूर हैं। पूरा सिस्टम भ्रष्ट हो चुका है और गांव के ही कुछ लोग वोट के सौदागर बन बैठे हैं। अमर उजाला ने इस संबंध में ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी बात जानने की कोशिश की।

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झुंझुनू शहर व गांव में पेयजल और पानी निकासी की समस्या लंबे अरसे से चली आ रही है। चुनाव आने पर लोग वोट तो डालते हैं लेकिन विकास होगा या नहीं यह कहना मुश्किल है। राजस्थान में जिन सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना हैं, उनमें झुंझुनू भी शामिल है। इस उपचुनाव को लेकर अमर उजाला की टीम ने ग्रामीणों से उनकी राय जानने का प्रयास किया। हालांकि झुंझुनू जिला मुख्यालय समेत ग्राम पंचायतों से जो मुख्य मुद्दा निकलकर सामने आया है, वह है भयंकर बेरोजगारी। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं होने के कारण युवा भेड़-बकरियां चराने को मजबूर हैं। युवाओं ने बताया कि चुनावी माहौल के बारे में तो ज्यादा कुछ जानकारी नहीं है लेकिन भेड़-बकरियां पालकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
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रोजगार और पानी है बड़ी समस्या

युवाओं ने बताया कि रोजगार नहीं मिलने के कारण आज यह नौबत आ गई है। भेड़-बकरियों को पालकर गुजारा करना पड़ रहा है। गांव में पानी की विकट समस्या है। कुछ युवाओं का तो यहां तक कहना है कि जन्म के बाद जब से होश संभाला है, तब से पेयजल और पानी की निकासी की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि चुनाव में लोग वोट जरूर डालेंगे, लेकिन विकास का कार्य होंगे या नहीं, इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि पूरा सिस्टम ही भ्रष्ट हो चुका है और ऐसे में विकास को लेकर बात करना बेमानी होगा।

पूरा सिस्टम ही हो चुका है भ्रष्ट

गांव में ही किराना दुकान चलाने वाले एक युवा का कहना है कि पूरा सिस्टम भ्रष्ट हो चुका है। बरसों बरस बीत गए लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है। गांव के ही कुछ लोग वोटों के ठेकेदार बन गए हैं, जो पैसे लेकर लोगों को बरगलाने का काम करते हैं। यही कारण है कि गांव में पक्की सड़क है पर पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी सड़कों पर जमा रहता है. जिससे आने-जाने वालों को काफी समस्या होती है। पूरा सिस्टम अभी भ्रष्ट है और आए दिन इस संबंध में खुलासे भी हो रहे हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्थिति दयनीय बनी हुई है।

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