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Jhunjhunu: सबसे ज्यादा सैनिक देने वाले जिले के युवा बेहाल, अग्निवीर भर्ती छोड़ दूसरी नौकरी की ओर कर रहे रुख

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनूं Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 20 Dec 2024 10:12 PM IST
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सार

झुंझुनूं जिले में भर्ती नहीं होने से युवाओं का ध्यान दूसरी नौकरियों की तैयारी की तरफ होने लगा है। एक वक्त था, जब सीकर, चूरू, झुंझुनूं और नीमकाथाना के लाखों युवा सुबह-शाम सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी में जुटे रहते थे।

Jhunjhunu youth of district which give most soldiers are in distress they are leaving the Agniveer recruitment
सेना भर्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश की सरहद की रक्षा करते झुंझुनूं के जवानों का सर्वोच्च बलिदान है। सबसे ज्यादा शहीद देने वालों में शुमार झुंझुनूं में अब युवाओं का सेना में जाने का जुनून कम हो रहा है। क्योंकि बीते पांच साल से झुंझुनूं जिले में सेना भर्ती रैली नहीं हो रही है। झुंझुनूं के युवाओं की दूसरे जिले में भर्ती होने और चार साल का कार्यकाल कर देने की वजह से आर्थिक समस्या, दूरी समेत आने वाली अन्य समस्याओं के चलते अब युवा सेना में जाना कम पंसद कर रहे हैं।

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झुंझुनूं जिले में भर्ती नहीं होने से युवाओं का ध्यान दूसरी नौकरियों की तैयारी की तरफ होने लगा है। एक वक्त था जब सीकर, चूरू, झुंझुनूं और नीमकाथाना के लाखों युवा सुबह-शाम सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी में जुटे रहते थे। साल 2019 में जिला स्वर्ण जयंती स्टेडियम में आखिरी बार सेना भर्ती रैली हुई थी। इस रैली में जिले के 40 हजार युवा दौड़े थे। ऐसे में अगर यहां के जनप्रतिनिधि झुंझुनूं जिले में अग्निवीर भर्ती रैली कराने का मुद्दा उठाएं तो शायद यहां पर फिर से रैली शुरू हो जाए और जिले के युवाओं का जोश व जुनून पहले की तरह सेना में जाने का हो जाए।
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ये हो रहा है नुकसान
जिले में रोजगार का ग्राफ गिरा। पहले रोजाना तीस से चालीस हजार युवा करते थे सेना में जाने की तैयारी। अब इसका दस फीसदी भी नहीं। दूसरे जिलों में भर्ती होने से युवाओं को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती है। जब तक भर्ती चलती है, वहीं पर युवाओं को रहना पड़ता है। इससे उन्हें समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। यहां पर खुले सेना के भर्ती दफ्तर में कोई काम नहीं हो रहा और ना ही उसका डवलपमेंट हो रहा। पहले सेना में जाने वाले युवाओं को तैयारी कराने वाले युवाओं के लिए सैकड़ों कोचिंग खुले थे। लेकिन अब जिलेभर में एक दर्जन भी नहीं बचे हैं।सेना में जाने के जुनून की वजह से रोजाना दौड़, व्यायाम व अन्य शारीरिक गतिविधि करने से युवा फिट रहते थे। तीनों सेनाओं में चार साल का कार्यकाल कर देने की वजह से युवाओं का ध्यान दूसरी नौकरियों की तरफ होने लगा।कोविड के दौरान चारों जिलों के सवा लाख से अधिक युवा हो गए थे ओवरएज।

संसद में उठा था सेना भर्ती रैली का मुद्दा
झुंझुनूं में सेना भर्ती रैली नहीं होने का मुद्दा संसद में भी उठ चुका है। पूर्व सांसद नरेंद्र खींचड़ ने संसद में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाया था। उन्होंने यह मुद्दा सात फरवरी 2022 को उठाया था। कई युवा संगठनों और पूर्व सैनिकों ने भी झुंझुनूं जिले में सेना भर्ती रैली करने का मुद्दा उठाया था। लेकिन समाधान कुछ नहीं निकला।

जिले में हुई सेना भर्ती रैली में दौड़े युवा
2013- 30,500
2014- 30,000
2015- 35,000
2018- 34,000
2019- 40,000

पहले हर साल होते थे 300 से 500 युवा भर्ती
सैन्य बहुल जिले में सेना भर्ती रैली नहीं होने से युवाओं में निराशा है। जानकारों के अनुसार, पहले झुंझुनूं में हर साल तीन सौ से पांच सौ युवा और सीकर में हर साल 300 से ज्यादा युवा सेना में भर्ती हो रहे थे। भर्ती नहीं होने और कोविड का दौर आ जाने की वजह से सीकर में करीब 60 हजार और झुंझुनूं में 50 हजार युवा तो ओवरएज हो चुके हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
जिले में पांच साल से सेना भर्ती रैली नहीं हुई। इस कारण युवाओं में निराशा है। यहां भर्ती नहीं होने से आसपास के सीकर, चूरू, नीमकाथाना आदि जिलों के युवाओं को भी भर्ती का मौका नहीं मिल पाया। झुंझुनूं जिले ने इतने शहीद और सैनिक दिए हैं। यहां पर भर्ती नहीं होने से युवाओं का मनोबल टूटा है। यह देश के लिए नुकसानदायक है। यहां भर्ती नहीं होने से यहां के बीआरओ आफिस में कोई काम नहीं हो रहा। ना उसका डेवलपमेंट हुआ। जिले में रोजगार का ग्राफ गिर गया। अच्छी-अच्छी कोचिंग जिसमें सेना की तैयारी होती थी। ज्यादातर कोचिंग बंद हो चुकी हैं।

राजपाल फोगाट, पूर्व सैनिक व प्रांतीय अध्यक्ष गौरव सेनानी शिक्षक संघ
सेना भर्ती रैली नहीं होने से सेना में युवाओं का जाने के प्रति जुनून कम हुआ है। दूसरे जिलों में यहां के युवाओं को भर्ती के लिए बुलाया जाता है। इससे उन्हें कई किलोमीटर का सफर तय कर जाना पड़ता है। इसके बाद जब तक भर्ती चलती है, वहीं पर रहना पड़ता है। एक तो चार साल का कार्यकाल कर दिया गया और दूसरा समय के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी होता है। यहां पर भर्ती हो तो समय के साथ-साथ आर्थिक बचत भी हो। सेना में जाने के प्रति जुनून कम होना देश के हित में नहीं है।

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