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Rajasthan: झुंझुनूं में बाल कल्याण समिति ने ही नाबालिग को मां से दूर रखा, हाईकोर्ट ने मिलवाया, जानें मामला
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनूं
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 27 Nov 2024 05:50 PM IST
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सार
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में बीते दिनों फर्जी पोस्टमॉर्टम का मामला सामने आया था। अब पॉक्सो एक्ट के तहत फर्जी एफआईआर दर्ज करने का भी मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद नाबालिग को उसकी मां को तुरंत सौंपने के आदेश जारी किए गए हैं।
फर्जी एफआईआर कांड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झुंझुनूं से बड़ी खबर सामने आई है। फर्जी पोस्टमॉर्टम का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब एक फर्जी एफआईआर का मामला सामने आया है। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। यही नहीं जिन बाल कल्याण समितियों को देख-रेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास का जिम्मा सौंपते हुए पॉवर दिए गए थे, उनके द्वारा अपने पॉवर का दुरुपयोग करने का मामला भी सामने आया है।
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दरअसल, पिछले महीने 12 अक्तूबर को चूरू जिले के महिला थाने में बाल कल्याण समिति झुंझुनूं ने एक नाबालिग बच्ची की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज करवाया था। मामला दर्ज करवाने के बाद बच्ची को जब उसकी मां बाल कल्याण समिति झुंझुनूं के पास लेने के लिए पहुंची तो करीब डेढ़ महीने तक उसे बच्ची नहीं सौंपी गई। अब मां की अपील पर राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए मां को उसकी बच्ची तुरंत सौंपने के आदेश दिए हैं। उसके बाद बच्ची ने चौंकाने वाले खुलासे किए।
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बच्ची ने बताया कि उससे खाली कागजों पर साइन करवाकर बाल कल्याण समिति की सदस्य शर्मिला पूनिया ने झूठी एफआईआर दर्ज करवाई है। साथ ही बाल कल्याण समिति झुंझुनूं और चूरू के कुछ ऐसे लोगों के नाम भी बताए हैं, जिनके द्वारा लगातार झूठी एफआईआर दर्ज करवाने का दबाव इस बच्ची पर था।
खास बात यह है कि बच्ची के साथ छेड़छाड़ की घटना की सूचना परिजनों को देने की बजाय बाल कल्याण समिति ने पुलिस को दी और सीधा एफआईआर दर्ज करवा दी। बच्ची के साथ जो कथित घटना बताई गई है, वो भी ढाई से तीन साल पुरानी है। लेकिन बाल कल्याण समिति ने एफआईआर दर्ज करवाने में इतनी दिलचस्पी दिखाई कि छुट्टी के दिन चूरू से बीकानेर, बीकानेर से झुंझुनूं और झुंझुनूं से चूरू दौड़कर एफआईआर दर्ज करवाई। एफआईआर दर्ज करवाने के बाद बच्ची को डेढ़ महीने तक मां को भी सुपुर्द नहीं किया।
सुलगते सवाल, जो मांगते हैं जवाब
- बाल कल्याण समिति का कार्य पॉक्सो एक्ट और अन्य केस दर्ज करवाना है या फिर बच्चों का पुनर्वास करना है?
- यदि बच्ची के साथ कुछ हुआ भी था तो ढाई-तीन साल तक उसने बीकानेर, झुंझुनूं और चूरू की बाल कल्याण समितियों और अन्य अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी?
- बाल कल्याण समिति चूरू ने झुंझुनूं का कार्यभार संभालते ही दो दिन में ऐसा कौन सा स्मार्ट वर्क किया कि तीन साल पुराना मामला बाहर निकाला और छुट्टी के दिन एफआईआर तक दर्ज करवा दी?
- यदि मां अपनी बेटी को ले जाना चाहती थी, बेटी मां के पास जाना चाहती थी तो बाल कल्याण समिति ने डेढ़ महीने तक उसे क्यों नहीं छोड़ा?
- मां की एप्लीकेशन पर जो बाल कल्याण समिति ने काउंसलिंग रिपोर्ट और एफआईआर रिपोर्ट मंगवाई, उसका उन्होंने क्या किया?