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Kota News: यूसीसी पर मौलाना आजमी का विरोध, कांवड़ यात्रा और सड़क पर नमाज पर भी उठाए सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Thu, 25 Jun 2026 01:35 PM IST
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सार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना ओबेदुल्ला खान आजमी ने कोटा में मीडिया से बातचीत के दौरान यूसीसी का विरोध करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कांवड़ यात्रा और सड़क पर नमाज को लेकर भी टिप्पणी की।
 

Kota News: Maulana Azmi Opposes UCC, Raises Questions on Kanwar Yatra and Road Prayers, Seeks Equal Rules
मौलाना ओबेदुल्ला खान आजमी के बयान से हड़कंप - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना ओबेदुल्ला खान आजमी ने बुधवार को कोटा प्रवास के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश न तो कुरान से चलता है, न गीता और न ही बाइबिल से, बल्कि भारतीय संविधान से संचालित होता है। मौलाना आजमी ने कहा कि संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बहुसंख्यक समाज अल्पसंख्यकों के धार्मिक और सामाजिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करे।


यूसीसी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इसे लागू करने की बात कर रही है लेकिन अब तक इसका स्पष्ट मसौदा भी सामने नहीं आया है। उनके अनुसार यूसीसी कोई अनिवार्य कानून नहीं बल्कि एक सुझाव है, जिसे जबरन लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
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यूसीसी का समर्थन करने वाले कुछ मुस्लिम संगठनों पर भी उन्होंने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज का वास्तविक प्रतिनिधित्व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड करता है और ऐसे संगठन समाज को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। मौलाना आजमी ने देश में बढ़ती महंगाई और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं के लिए भी केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जनता आज महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों से जूझ रही है, लेकिन सरकार का ध्यान अन्य विषयों पर अधिक केंद्रित है।

सड़क पर नमाज और कांवड़ यात्रा को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों और समुदायों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उनका आरोप था कि कांवड़ यात्रा के दौरान कई स्थानों पर सड़कें बंद हो जाती हैं और आम लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है लेकिन उस पर उतनी सख्ती नहीं दिखाई जाती जितनी अन्य मामलों में दिखाई जाती है। उन्होंने प्रशासन और सरकार पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।

मौलाना आजमी ने बिलकिस बानो प्रकरण का भी उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान न्याय और कानून का समान रूप से पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती वैचारिक और सामाजिक दूरी देश के लिए चिंताजनक है। यदि समय रहते सभी वर्गों के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत नहीं किया गया तो इसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ सकता है। उन्होंने सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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