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'मेरे घर में 10 बार ट्रिप हुई बिजली': कोटा की बदहाल व्यवस्था पर भड़के ऊर्जा मंत्री, अधिकारियों को लगाई फटकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: कोटा ब्यूरो
Updated Sat, 30 May 2026 05:20 PM IST
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सार
कोटा में लगातार बिजली ट्रिपिंग और फॉल्ट की शिकायतों पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने केईडीएल अधिकारियों को तलब कर कड़ी फटकार लगाई। मंत्री ने कहा कि उनके घर में ही 10 बार बिजली ट्रिप हुई।
ऊर्जा मंत्री ने केईडीएल अधिकारियों की बैठक ली
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोटा शहर में लगातार हो रही बिजली ट्रिपिंग, फॉल्ट और उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान में देरी को लेकर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने फ्रेंचाइजी कंपनी कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिक्ट लिमिटेड (केईडीएल) के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने आवास स्थित कार्यालय में बुलाकर बिजली व्यवस्था की खामियों पर नाराजगी जताई और त्वरित सुधार के निर्देश दिए।
शहर के बढ़ती बिजली की समस्याओं पर जवाब मांगा
बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री ने केईडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मनीष अरोड़ा और टेक्निकल हेड वेंकटेशन कोड़ी से शहर में बढ़ती बिजली समस्याओं पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि लगातार ट्रिपिंग और फॉल्ट की घटनाओं से आमजन परेशान हैं, जबकि शिकायतों के समाधान में भी अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
मंत्री के घर में ही 10 बार बिजली ट्रिप हुई
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शनिवार सुबह उनके घर पर ही करीब 10 बार बिजली ट्रिप हुई। उन्होंने टिप्पणी की कि वर्तमान स्थिति में कई गांवों की बिजली व्यवस्था शहर से बेहतर दिखाई दे रही है। उन्होंने केईडीएल पर उपभोक्ताओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया। बैठक में ऊर्जा मंत्री ने फॉल्ट रिपेयर टीम (एफआरटी) की कार्यप्रणाली और उपलब्ध संसाधनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण फॉल्ट सुधारने में अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो सके।
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सरकार उठाएगी सख्त कदम
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले दो महीनों में बिजली व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं दिखा तो सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। बैठक के दौरान उन्होंने केईडीएल और जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) की कार्यप्रणाली की तुलना करते हुए कहा कि सरकारी बिजली कंपनियों के अधिकारी जनता के बीच पहुंचकर समस्याएं सुनते हैं, जबकि केईडीएल के अधिकारियों की आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सीमित है। उन्होंने निर्देश दिए कि कंपनी अपना प्रशासनिक ढांचा अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाए।
ये भी पढ़ें- चूरू में तेज आंधी का तांडव: 70 की रफ्तार से चली हवाएं, रेत के कारण आसमान हुआ पीला; देखें वीडियो
ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों के संपर्क नंबर सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश भी दिए, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर सहायता मिल सके और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके।
शहर के बढ़ती बिजली की समस्याओं पर जवाब मांगा
बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री ने केईडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मनीष अरोड़ा और टेक्निकल हेड वेंकटेशन कोड़ी से शहर में बढ़ती बिजली समस्याओं पर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि लगातार ट्रिपिंग और फॉल्ट की घटनाओं से आमजन परेशान हैं, जबकि शिकायतों के समाधान में भी अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।
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मंत्री के घर में ही 10 बार बिजली ट्रिप हुई
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शनिवार सुबह उनके घर पर ही करीब 10 बार बिजली ट्रिप हुई। उन्होंने टिप्पणी की कि वर्तमान स्थिति में कई गांवों की बिजली व्यवस्था शहर से बेहतर दिखाई दे रही है। उन्होंने केईडीएल पर उपभोक्ताओं की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता की कमी का आरोप लगाया। बैठक में ऊर्जा मंत्री ने फॉल्ट रिपेयर टीम (एफआरटी) की कार्यप्रणाली और उपलब्ध संसाधनों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण फॉल्ट सुधारने में अनावश्यक देरी हो रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो सके।
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सरकार उठाएगी सख्त कदम
मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले दो महीनों में बिजली व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं दिखा तो सरकार को कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। बैठक के दौरान उन्होंने केईडीएल और जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) की कार्यप्रणाली की तुलना करते हुए कहा कि सरकारी बिजली कंपनियों के अधिकारी जनता के बीच पहुंचकर समस्याएं सुनते हैं, जबकि केईडीएल के अधिकारियों की आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सीमित है। उन्होंने निर्देश दिए कि कंपनी अपना प्रशासनिक ढांचा अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाए।
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ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों के संपर्क नंबर सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश भी दिए, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर सहायता मिल सके और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके।