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Rajasthan: कोटा में 11 घंटे तक तड़पती रही प्रसूता, प्रसव के बाद हुई मौत; परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
Mon, 10 Aug 2026 02:43 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:43 PM IST
सार
कोटा के जेके लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में प्रसव के बाद 34 वर्षीय गंगोत्री सैनी की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही, समय पर उपचार नहीं मिलने और अस्पताल स्टाफ पर अभद्रता व मारपीट के आरोप लगाए हैं।
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फोटो- मृतका
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोटा शहर के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु चिकित्सालय जेके लोन अस्पताल में प्रसव के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग होने से एक महिला की मृत्यु हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन, ऑन-ड्यूटी चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही बरतने के साथ ही अभद्रता और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है। घटना से आक्रोशित परिजनों ने पोस्टमार्टम कक्ष के बाहर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रसव के बाद बिगड़ी महिला की हालत
खेड़ा रामपुर निवासी 34 वर्षीय गंगोत्री सैनी को शनिवार शाम करीब 5 बजे जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार देर रात करीब 11 बजे महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्ची को जन्म दिया। बेटी के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन प्रसव के तुरंत बाद ही महिला की स्थिति बिगड़ने लगी और ब्लीडिंग शुरू हो गई। परिजनों ने तत्काल चिकित्सा कर्मियों को इसकी जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि स्टाफ ने केवल आश्वासन दिया और ब्लीडिंग रोकने के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए।
अस्पताल स्टाफ पर बदसलूकी का आरोप
मृतका के पति राकेश सैनी ने बताया कि रविवार को दिनभर महिला की स्थिति बिगड़ती रही। इस दौरान उसे 10 से 12 यूनिट ब्लड भी चढ़ाया गया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ब्लीडिंग पर काबू नहीं पाया जा सका। पीड़ित पति का आरोप है कि पत्नी की गंभीर हालत देखकर जब उन्होंने उचित इलाज करने या किसी उच्च केंद्र में रेफर करने की गुहार लगाई, तो अस्पताल स्टाफ ने उनके साथ बदसलूकी की। परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों और स्टाफ ने उनके साथ हाथापाई की, थप्पड़ मारे और चुप रहने की धमकी दी। लगभग 11 घंटे तक लगातार ब्लीडिंग होने और समय पर प्रभावी उपचार नहीं मिलने के कारण सुबह करीब 5 बजे महिला ने दम तोड़ दिया।
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पेशाब की समस्या के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों के अनुसार, नौ अगस्त की रात करीब 2 बजे गंगोत्री को अचानक तेज ब्लीडिंग शुरू हुई। काफी देर बाद ब्लीडिंग तो रुक गई, लेकिन इसके बाद उसे पेशाब आने में परेशानी होने लगी। नलकी लगाने के बाद भी पेशाब शुरू नहीं हुआ। मृतका के पति राकेश सैनी के अनुसार, प्रसूता की हालत बिगड़ने पर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। पति ने आरोप लगाया कि वार्ड में मौजूद उनकी बहन ने जब इलाज को लेकर विरोध जताया, तो महिला नर्सिंगकर्मियों ने उससे अभद्रता की और चांटा मारने की कोशिश की। पंचायत समिति सदस्य अनूप मेहरा और परिजनों ने न्याय मिलने तथा निष्पक्ष जांच होने तक पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया है।
ये भी पढ़ें- जयपुर में कांग्रेस का हल्लाबोल, पुलिस ने चलाई वाटर कैनन; खाचरियावास का भजनलाल सरकार पर हमला
अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि गंगोत्री बाई का प्रसव स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता शर्मा की यूनिट में हुआ था। प्रसव के बाद प्रसूता को अचानक ज्यादा ब्लीडिंग हुई थी, जिसके बाद चिकित्सकों की टीम ने तत्परता से उपचार शुरू किया था। डॉक्टरों की निरंतर निगरानी में इलाज चल रहा था। अधीक्षक ने बताया कि सोमवार तड़के प्रसूता को अचानक घबराहट हुई और उसके फेफड़ों में रक्त का थक्का जम गया। हालत बेहद गंभीर होने के कारण उसकी मौत हो गई। अधीक्षक ने कहा कि घटना को लेकर अस्पताल स्टाफ से बातचीत कर समझाइश की जाएगी।
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प्रसव के बाद बिगड़ी महिला की हालत
खेड़ा रामपुर निवासी 34 वर्षीय गंगोत्री सैनी को शनिवार शाम करीब 5 बजे जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार देर रात करीब 11 बजे महिला ने सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्ची को जन्म दिया। बेटी के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन प्रसव के तुरंत बाद ही महिला की स्थिति बिगड़ने लगी और ब्लीडिंग शुरू हो गई। परिजनों ने तत्काल चिकित्सा कर्मियों को इसकी जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि स्टाफ ने केवल आश्वासन दिया और ब्लीडिंग रोकने के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए।
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अस्पताल स्टाफ पर बदसलूकी का आरोप
मृतका के पति राकेश सैनी ने बताया कि रविवार को दिनभर महिला की स्थिति बिगड़ती रही। इस दौरान उसे 10 से 12 यूनिट ब्लड भी चढ़ाया गया, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ब्लीडिंग पर काबू नहीं पाया जा सका। पीड़ित पति का आरोप है कि पत्नी की गंभीर हालत देखकर जब उन्होंने उचित इलाज करने या किसी उच्च केंद्र में रेफर करने की गुहार लगाई, तो अस्पताल स्टाफ ने उनके साथ बदसलूकी की। परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों और स्टाफ ने उनके साथ हाथापाई की, थप्पड़ मारे और चुप रहने की धमकी दी। लगभग 11 घंटे तक लगातार ब्लीडिंग होने और समय पर प्रभावी उपचार नहीं मिलने के कारण सुबह करीब 5 बजे महिला ने दम तोड़ दिया।
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पेशाब की समस्या के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों के अनुसार, नौ अगस्त की रात करीब 2 बजे गंगोत्री को अचानक तेज ब्लीडिंग शुरू हुई। काफी देर बाद ब्लीडिंग तो रुक गई, लेकिन इसके बाद उसे पेशाब आने में परेशानी होने लगी। नलकी लगाने के बाद भी पेशाब शुरू नहीं हुआ। मृतका के पति राकेश सैनी के अनुसार, प्रसूता की हालत बिगड़ने पर ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। पति ने आरोप लगाया कि वार्ड में मौजूद उनकी बहन ने जब इलाज को लेकर विरोध जताया, तो महिला नर्सिंगकर्मियों ने उससे अभद्रता की और चांटा मारने की कोशिश की। पंचायत समिति सदस्य अनूप मेहरा और परिजनों ने न्याय मिलने तथा निष्पक्ष जांच होने तक पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया है।
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अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि गंगोत्री बाई का प्रसव स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता शर्मा की यूनिट में हुआ था। प्रसव के बाद प्रसूता को अचानक ज्यादा ब्लीडिंग हुई थी, जिसके बाद चिकित्सकों की टीम ने तत्परता से उपचार शुरू किया था। डॉक्टरों की निरंतर निगरानी में इलाज चल रहा था। अधीक्षक ने बताया कि सोमवार तड़के प्रसूता को अचानक घबराहट हुई और उसके फेफड़ों में रक्त का थक्का जम गया। हालत बेहद गंभीर होने के कारण उसकी मौत हो गई। अधीक्षक ने कहा कि घटना को लेकर अस्पताल स्टाफ से बातचीत कर समझाइश की जाएगी।