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Rajasthan: 45 डिग्री तापमान में तपस्या! साधु रामानंद दास की कठोर साधना बनी आस्था का केंद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 07:17 PM IST
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सार
राजस्थान के कोटपूतली में 45 डिग्री तापमान के बीच साधु रामानंद दास महाराज पिछले दो महीनों से अग्नि के बीच बैठकर कठोर धूनी तपस्या कर रहे हैं। श्रद्धालु इसे आस्था, त्याग और विश्व शांति के लिए की जा रही अनोखी साधना मान रहे हैं।
45 डिग्री तापमान के बीच सीताराम बड़ा मंदिर में अग्नि धूनी के मध्य तपस्या करते साधु रामानंद दास
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोटपूतली में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच एक अनोखी तपस्या लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। शहर के सीताराम बड़ा मंदिर ट्रस्ट में साधु रामानंद दास महाराज पिछले दो महीनों से कठोर ‘धूनी तपस्या’ कर रहे हैं। करीब 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तापमान में अग्नि के बीच बैठकर की जा रही यह साधना श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।
अग्नि-वृत्त के बीच तीन घंटे तक साधना
मंदिर परिसर में प्रतिदिन दोपहर के समय साधु रामानंद दास महाराज उपलों और लकड़ियों से प्रज्वलित धूनी के बीच बैठकर तीन घंटे तक मंत्र जाप और ध्यान करते हैं। चारों ओर धधकती आग और ऊपर से तेज धूप के बीच उनकी यह तपस्या त्याग, संयम और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक मानी जा रही है।
बसंत पंचमी से शुरू हुई तपस्या
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धूनी तपस्या की यह परंपरा हर वर्ष बसंत पंचमी से शुरू होती है। इस वर्ष भी तपस्या उसी दिन आरंभ हुई थी, जिसका समापन 25 मई को गंगा दशमी के अवसर पर होगा। समापन पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।
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विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना
मंदिर से जुड़े संतों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तरह की अग्नि तपस्या किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि विश्व शांति, मानव कल्याण और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के उद्देश्य से की जाती है। भारतीय संत परंपरा में हठयोग और अग्नि तपस्या का विशेष महत्व माना जाता है।
श्रद्धालुओं की उमड़ रही भीड़
भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। लोग साधु रामानंद दास महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं और उनकी कठोर साधना को आस्था का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह-शाम भजन-कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों से भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
अग्नि-वृत्त के बीच तीन घंटे तक साधना
मंदिर परिसर में प्रतिदिन दोपहर के समय साधु रामानंद दास महाराज उपलों और लकड़ियों से प्रज्वलित धूनी के बीच बैठकर तीन घंटे तक मंत्र जाप और ध्यान करते हैं। चारों ओर धधकती आग और ऊपर से तेज धूप के बीच उनकी यह तपस्या त्याग, संयम और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक मानी जा रही है।
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बसंत पंचमी से शुरू हुई तपस्या
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि धूनी तपस्या की यह परंपरा हर वर्ष बसंत पंचमी से शुरू होती है। इस वर्ष भी तपस्या उसी दिन आरंभ हुई थी, जिसका समापन 25 मई को गंगा दशमी के अवसर पर होगा। समापन पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।
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विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना
मंदिर से जुड़े संतों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तरह की अग्नि तपस्या किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि विश्व शांति, मानव कल्याण और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के उद्देश्य से की जाती है। भारतीय संत परंपरा में हठयोग और अग्नि तपस्या का विशेष महत्व माना जाता है।
श्रद्धालुओं की उमड़ रही भीड़
भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। लोग साधु रामानंद दास महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं और उनकी कठोर साधना को आस्था का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह-शाम भजन-कीर्तन और धार्मिक गतिविधियों से भक्तिमय माहौल बना हुआ है।