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23 साल की लेफ्टिनेंट अंशु पंचतत्व में विलीन, गांव में शोक की लहर; पांच पीढ़ियों में थीं पहली सैन्य अधिकारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: नागौर ब्यूरो Updated Tue, 07 Apr 2026 08:29 AM IST
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सार

राजस्थान के बिठुड़ा गांव की नौसेना सब लेफ्टिनेंट अंशु राठौड़ का गुजरात में सड़क हादसे में 23 साल की उम्र में निधन हो गया। 14 किमी लंबी तिरंगा यात्रा और सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

23-year old Lt Anshu dies in road accident Brother performs last rites, first officer in 5 generations
23 वर्षीय अंशु राठौड़ का सड़क हादसे में निधन हो गया - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

राजस्थान के डीडवाना-कुचामन क्षेत्र के बिठुड़ा गांव की बेटी और भारतीय नौसेना की सब-लेफ्टिनेंट अंशु राठौड़ का महज 23 साल की उम्र में असामयिक निधन हो गया। रविवार सुबह वे अपनी अगली तैनाती के लिए पुणे से जामनगर स्थित INS वलसुरा जा रही थीं, तभी गुजरात में एक सड़क दुर्घटना में उनकी कार दूसरे वाहन से टकरा गई। गंभीर रूप से घायल अंशु ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनके साथ मौजूद दो अन्य अधिकारी सुरक्षित बच गए। इस दुखद खबर ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया।
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14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकली
सोमवार को अंशु का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से उनके पैतृक गांव बिठुड़ा लाया गया। डीडवाना से बिठुड़ा तक करीब 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण, सैन्य अधिकारी और स्थानीय लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंजते रहे और हर आंख नम थी। गांव पहुंचने पर पुष्पचक्र अर्पित किए गए। इसके बाद घर से मुक्तिधाम तक करीब एक किलोमीटर की अंतिम यात्रा में पूरा गांव साथ चला।
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सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ संपन्न हुआ। अंशु के छोटे भाई भूपेश सिंह ने मुखाग्नि दी। भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने पिता किशन सिंह को राष्ट्रध्वज सौंपा। पूरा माहौल भावुकता से भरा था और हर कोई इस बहादुर बेटी को श्रद्धा से नमन कर रहा था।

साल 2024 में बनी थीं सब-लेफ्टिनेंट
अंशु ने वर्ष 2024 में पहले ही प्रयास में भारतीय नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट का कमीशन हासिल किया था। वे परिवार की पांच पीढ़ियों में सेना में कमीशन पाने वाली पहली बेटी थीं। उनके दादा और पिता दोनों सेना से सेवानिवृत्त हैं। पिता किशन सिंह जयपुर में आबकारी थाना अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने भरे गले से कहा कि बेटी को खोने का दर्द असहनीय है, लेकिन उसकी देशभक्ति और संकल्प पर उन्हें हमेशा गर्व रहेगा। अंशु का सपना आगे चलकर आईएएस या आईपीएस बनकर देश की सेवा करना था, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था।

डीडवाना-कुचामन जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी अंशु के सैन्य योगदान को याद करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में देश के प्रति इतना समर्पण अतुलनीय है। बिठुड़ा और आसपास के इलाकों में गहरा सन्नाटा पसरा है। लोग कह रहे हैं कि अंशु सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि राजस्थान की हर बेटी की प्रेरणा थीं।
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