{"_id":"698b5b12c73742057705d1bc","slug":"nagaur-news-jayal-s-dowry-in-news-again-brahmin-brothers-paid-crores-of-rupees-to-their-sister-s-family-2026-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: मामा ने दिए 81 लाख नकद, 25 तोला सोना और..., इस बार ब्राह्मण भाइयों के करोड़ों के मायरे की चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: मामा ने दिए 81 लाख नकद, 25 तोला सोना और..., इस बार ब्राह्मण भाइयों के करोड़ों के मायरे की चर्चा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 09:51 PM IST
विज्ञापन
सार
Nagaur News: नागौर के जायल में ब्राह्मण भाइयों द्वारा बहन के परिवार में करोड़ों रुपये का मायरा भरे जाने से क्षेत्र फिर चर्चा में है। पारंपरिक मायरा रिवाज ने सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर उजागर किया।
जायल का करोड़ों का मायरा फिर चर्चा में
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
नागौर जिले की जायल तहसील एक बार फिर अपने मायरे की परंपरा को लेकर चर्चा में है। जाट समुदाय के मायरे लंबे समय से प्रसिद्ध रहे हैं, लेकिन इस बार ब्राह्मण समाज के दो भाइयों द्वारा भरे गए मायरे ने जायल का नाम फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
Trending Videos
ब्राह्मण भाइयों ने निभाई पारंपरिक जिम्मेदारी
जायल निवासी ललित व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री के पुत्र निलेश के विवाह अवसर पर मायरा भरकर सामाजिक परंपरा का निर्वहन किया। एंकर के अनुसार, दोनों भाइयों ने मिलकर 1 करोड़ 61 लाख रुपये का मायरा भरा, जिसमें 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना, चांदी के जेवरात और अन्य घरेलू सामान शामिल बताया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
मायरे की राशि को लेकर अलग-अलग उल्लेख
विवरण के अनुसार, एक अन्य उल्लेख में यह भी कहा गया है कि मायरे की कुल राशि 1 करोड़ 81 लाख रुपये रही। इसे ब्राह्मण समाज के इतिहास का सबसे बड़ा मायरा बताया जा रहा है, जिसने क्षेत्र में विशेष चर्चा को जन्म दिया है।
पढ़ें- ‘साहब, आश्वासन तो सब देते हैं’: बुजुर्ग की बात दिल को लगी तो विधायक ने हाथ पर लिख दिया वादा, भीलवाड़ा का मामला
राजस्थान की सांस्कृतिक परंपराओं में मायरा एक महत्वपूर्ण सामाजिक रिवाज है। विवाह के अवसर पर मामा द्वारा भांजा या भांजी को दिए जाने वाले उपहार को मायरा कहा जाता है। जायल क्षेत्र में इसे ‘जायल खिंयाला मायरा’ के नाम से जाना जाता है, जिसमें महिलाएं विशेष पारंपरिक गीत भी गाती हैं।
जायल के मायरे की ऐतिहासिक पहचान
नागौर जिले के जायल तहसील में मायरे की परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे राजस्थान की लोक-संस्कृति की एक विशिष्ट पहचान माना जाता है। समय-समय पर यहां भरे गए मायरे सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उदाहरण बनते रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, नागौर जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान ऐसे छह से सात मायरे भरे जा चुके हैं। इन अवसरों पर भाइयों ने जमीन, नकद राशि, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य सामान देकर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई और परिवार का नाम प्रतिष्ठित किया।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन