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नाथद्वारा में सजी गुलाबी घटा की अलौकिक छटा, श्रीनाथजी की हवेली में कुसुम गुलाब महल मनोरथ ने मोहा मन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजसमंद
Published by: राजसमंद ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jun 2026 10:30 PM IST
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सार
नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी की हवेली में अधिकमास के अवसर पर कुसुम गुलाब महल मनोरथ और गुलाबी घटा की भव्य झांकी सजाई गई। श्रीनाथजी और नवनीतप्रियाजी के विशेष श्रृंगार, कीर्तन और आकर्षक सजावट के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
श्रीनाथजी में कुसुम गुलाब महल में बैठे मनोरथ
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजसमंद में पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी की हवेली में अधिकमास के मनोरथों की श्रृंखला के तहत मंगलवार को ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया पर श्रद्धा, भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर श्रीनाथजी प्रभु के समक्ष कुसुम गुलाब महल में बैठे मनोरथ एवं गुलाबी घटा की मनमोहक झांकी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
हवेली में ठाकुरजी को राजभोग के समय गुलाबी मलमल का आड़बंध, श्रीमस्तक पर गोल पाग तथा गणगौर भाव की चित्रित पिछवाई धारण कराई गई। उष्णकालीन श्रृंगार के अंतर्गत मोतियों के हल्के आभूषण, श्रीकर्ण में कर्णफूल, मस्तक पर गोल चंद्रिका तथा गुलाबी मीना वेणु-वेत्र से प्रभु का विशेष श्रृंगार किया गया।
राजभोग के दौरान श्रीनाथजी को गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित मंडली में विराजमान कराया गया, जबकि श्री नवनीतप्रियाजी को केसरी घटा एवं केसरी गणगौर मनोरथ के भाव से विशेष बंगले में विराजित किया गया। संध्या आरती के समय गुलाबी गणगौर के भाव से विशेष श्रृंगार धराया गया, जिसमें ललिताजी स्वरूप की भावना के अनुरूप सभी वस्त्र और साज-सज्जा गुलाबी रंग में सजाए गए।
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श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी इस झांकी के दर्शन के लिए स्थानीय भक्तों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भी भारी भीड़ उमड़ी। श्री नवनीतप्रियाजी के समक्ष केसरी गणगौर मनोरथ के अंतर्गत विशेष लाड़-लड़ाने की परंपरा का निर्वहन किया गया।
इस दौरान कीर्तनकारों ने ‘वृंदावन कुंजन में मध्य खासखानो’ और ‘दरस जाए दे री आली’ सहित विभिन्न पदों का संगीतमय कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्री लाडले लाल प्रभु के समक्ष केसरी रंगों से सुसज्जित चांदी की गोपियों तथा पशु-पक्षियों की आकर्षक झांकी भी सजाई गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
ये भी पढ़ें- आरपीएससी ने निकाली वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी भर्ती: 11 जून से आवेदन शुरू; तीन पदों पर होगी नियुक्ति
इस अवसर पर तिलकायत परिवार भी प्रभु सेवा में उपस्थित रहा। चिरंजीव विशाल बावा ने परंपरानुसार प्रभु को लाड़ लड़ाकर आरती उतारी और भक्तों ने भावपूर्ण दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
हवेली में ठाकुरजी को राजभोग के समय गुलाबी मलमल का आड़बंध, श्रीमस्तक पर गोल पाग तथा गणगौर भाव की चित्रित पिछवाई धारण कराई गई। उष्णकालीन श्रृंगार के अंतर्गत मोतियों के हल्के आभूषण, श्रीकर्ण में कर्णफूल, मस्तक पर गोल चंद्रिका तथा गुलाबी मीना वेणु-वेत्र से प्रभु का विशेष श्रृंगार किया गया।
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राजभोग के दौरान श्रीनाथजी को गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित मंडली में विराजमान कराया गया, जबकि श्री नवनीतप्रियाजी को केसरी घटा एवं केसरी गणगौर मनोरथ के भाव से विशेष बंगले में विराजित किया गया। संध्या आरती के समय गुलाबी गणगौर के भाव से विशेष श्रृंगार धराया गया, जिसमें ललिताजी स्वरूप की भावना के अनुरूप सभी वस्त्र और साज-सज्जा गुलाबी रंग में सजाए गए।
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