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नाथद्वारा में अधिकमास के दिव्य मनोरथ: चंदन बंगले में विराजे श्रीजी; फुहारों और पुष्प शृंगार ने किया भाव-विभोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजसमंद
Published by: राजसमंद ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jun 2026 10:51 AM IST
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सार
अधिकमास के पावन अवसर पर श्रीनाथजी की हवेली में रविवार को ऊष्णकालीन सेवा के विशेष मनोरथों का भव्य आयोजन हुआ। चंदन के बंगले, फुहारों, पुष्प सज्जा और मनोहारी शृंगार से सुसज्जित प्रभु की झांकियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
श्रीनाथजी मंदिर में अधिक मास पर मनोरथ के दर्शन
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विस्तार
पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी की हवेली में अधिकमास के मनोरथों की शृंखला के तहत रविवार को ज्येष्ठ कृष्ण सप्तमी पर ऊष्णकालीन सेवा के विशेष मनोरथ आयोजित किए गए। गोस्वामी तिलकायत राकेश महाराज की आज्ञा एवं युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के मार्गदर्शन में श्रीनाथजी प्रभु में ‘छूटत फुहारे आगे निके’ तथा श्री नवनीत प्रियाजी में ‘रंग महल में बैठे पिय प्यारी’ मनोरथ की मनोहारी झांकी सजाई गई।
राजभोग दर्शन में श्रीनाथजी को चंदन के सुंदर बंगले में बिराजित कर चीरहरण लीला का भावपूर्ण मनोरथ किया गया। मणि कोठे में यमुनाजी के स्वरूप में जल भरकर रजत एवं लकड़ी की सखियों तथा कृत्रिम वृक्षों के माध्यम से लीला का सजीव चित्रण किया गया।
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इस ऊष्णकालीन सेवा में प्रभु को मोतियों के आभूषण, शरबती मलमल के वस्त्र, पुष्पमालाओं एवं मनोहारी शृंगार से अलंकृत किया गया। वहीं श्री लाडले लाल प्रभु में राजभोग के दौरान पुष्पों से सुसज्जित अद्भुत पालने का मनोरथ आयोजित हुआ, जिसमें प्रियाजी को सुंदर पालने में विराजित किया गया।
सायंकालीन दर्शन में श्रीनाथजी को चंदन के बंगले में विराजित कर फुहारों का मनोरथ किया गया। फूल-पत्तियों की आकर्षक सजावट, रंगोली तथा हाथी, घोड़े और बतख की मनोहारी आकृतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। इस दौरान तिलकायत राकेश महाराज, युवाचार्य विशाल बावा एवं लाल बावा साहब ने प्रभु की सेवा में उपस्थित होकर लाड़ लड़ाए।
श्री नवनीत प्रियाजी में ‘रंग महल में बैठे पिय प्यारी’ मनोरथ के अंतर्गत मोती महल में चांदी की हटड़ी में विराजित प्रभु के समक्ष पुष्प सांझी सजाई गई। लाल-सफेद पुष्पों, रजत सखियों, गौमाताओं एवं विविध खेल-खिलौनों से सजी झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राजभोग दर्शन में श्रीनाथजी को चंदन के सुंदर बंगले में बिराजित कर चीरहरण लीला का भावपूर्ण मनोरथ किया गया। मणि कोठे में यमुनाजी के स्वरूप में जल भरकर रजत एवं लकड़ी की सखियों तथा कृत्रिम वृक्षों के माध्यम से लीला का सजीव चित्रण किया गया।
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सायंकालीन दर्शन में श्रीनाथजी को चंदन के बंगले में विराजित कर फुहारों का मनोरथ किया गया। फूल-पत्तियों की आकर्षक सजावट, रंगोली तथा हाथी, घोड़े और बतख की मनोहारी आकृतियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। इस दौरान तिलकायत राकेश महाराज, युवाचार्य विशाल बावा एवं लाल बावा साहब ने प्रभु की सेवा में उपस्थित होकर लाड़ लड़ाए।
श्री नवनीत प्रियाजी में ‘रंग महल में बैठे पिय प्यारी’ मनोरथ के अंतर्गत मोती महल में चांदी की हटड़ी में विराजित प्रभु के समक्ष पुष्प सांझी सजाई गई। लाल-सफेद पुष्पों, रजत सखियों, गौमाताओं एवं विविध खेल-खिलौनों से सजी झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

श्रीनाथजी मंदिर में अधिक मास पर मनोरथ के दर्शन। फोटो- अमर उजाला