Rajasthan: सीकर में एक साथ सात लोगों ने लिया संयम का संकल्प, शोभायात्रा से लेकर दीक्षा तक उमड़ा आस्था का सैलाब
सीकर में भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में सात लोगों ने एक साथ जैन दीक्षा ली। 39 साल बाद ऐसा अवसर आया। दीक्षा से पहले सातों मुमुक्षुओं की शोभायात्रा निकाली गई।
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जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस के अवसर पर सीकर में आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में एक ही मंच से सात लोगों ने जैन दीक्षा ग्रहण कर संन्यास मार्ग अपना लिया। सीकर के इतिहास में 39 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक साथ सात मुमुक्षुओं के संसार त्यागने का यह अवसर सामने आया।
इससे पहले मार्च 1987 में आचार्य धर्मसागर ने सीकर में क्षुल्लिका अनंतमति को दीक्षा प्रदान की थी। वहीं, वर्ष 1961 में आचार्य शिव सागर के सान्निध्य में आठ लोगों ने एक साथ दीक्षा ग्रहण की थी। आयोजन समिति के प्रतिनिधि सुभाष पहाड़िया ने बताया कि दीक्षा समारोह से पहले मंगलवार शाम सातों दीक्षार्थियों की शोभायात्रा निकाली गई। भक्ति संगीत और जयकारों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। उन्होंने बताया कि छह दीक्षार्थियों ने बर्तनों के बजाय अपनी हथेलियों में आहार ग्रहण कर त्याग और संयम का संदेश दिया।
इन सात मुमुक्षुओं ने ली दीक्षा
क्षुल्लक प्राप्तिसागर: पूर्व नाम दिलीप। जन्म 1 जून 1956 को हुआ और निवासी आलास, महाराष्ट्र हैं। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है। उनकी पत्नी आर्यिका विनम्रवती और बड़े भाई समाधिस्थ मुनि परमानंद सागर पहले ही दीक्षा ग्रहण कर चुके हैं। उन्होंने 6 सितंबर 2024 को क्षुल्लक दीक्षा ली थी।
क्षुल्लक प्रतिज्ञासागर: पूर्व नाम हुक्मीचंद। जन्म 25 मार्च 1957 को हुआ और निवासी सलूंबर हैं। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। उनकी पत्नी भी साधु जीवन अपना चुकी हैं। उन्होंने 29 अप्रैल 2026 को जयपुर में क्षुल्लक दीक्षा ली थी।
क्षुल्लिका प्रदीप्तमती: पूर्व नाम कांता देवी। जन्म 1 जनवरी 1959 को हुआ और निवासी सलूंबर हैं। उनके पति भी पहले संयम मार्ग अपना चुके हैं। उन्होंने 29 अप्रैल 2026 को जयपुर में क्षुल्लिका दीक्षा ली थी।
नवरत्न पाटनी: जन्म 8 मार्च 1940 को हुआ और निवासी आनंदपुर कालू, वर्तमान जयपुर हैं। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है। वर्ष 2016 में उन्होंने सातवीं और वर्ष 2020 में चौथी व्रत प्रतिमा का नियम लिया था।
शकुंतला देवी: जन्म 2 फरवरी 1969 को हुआ और निवासी कोटिया हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है। वर्ष 2026 में उन्होंने सातवीं व्रत प्रतिमा ली थी।
महावीर प्रसाद जैन (सेठी): जन्म 18 अगस्त 1942 को हुआ और निवासी बनेठा, टोंक हैं। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है। 7 अगस्त को उन्होंने सीकर में आचार्यश्री को दीक्षा का श्रीफल अर्पित किया था।
मनोरमा जैन: जन्म 19 फरवरी 1945 को हुआ और निवासी सनावद हैं। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की है।
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दीक्षा स्थल पर बनाया सम्मेद शिखरजी का प्रतीकात्मक स्वरूप
जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव स्थल पर श्रद्धालुओं के लिए झारखंड स्थित सम्मेद शिखरजी यानी पारसनाथ पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप बनाया गया। थर्माकोल से तैयार भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक से जुड़े इस शिखर को आयोजन स्थल का मुख्य आकर्षण बनाया गया।
आयोजन समिति के सदस्य पवन मोदी ने बताया कि पार्श्वनाथ प्रभु का मोक्ष कल्याणक पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इसी तिथि पर भगवान पार्श्वनाथ ने सम्मेद शिखरजी से मोक्ष प्राप्त किया था। समिति के अनुभव जैन ने बताया कि प्रतीकात्मक स्वरूप तैयार करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सम्मेद शिखरजी तीर्थ की अनुभूति कराना था।