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Sikar: प्रसव तक सब ठीक था, इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी हालत! प्रसूता की मौत से बवाल; दूसरे दिन भी धरना जारी
Fri, 24 Jul 2026 10:19 PM IST
सीकर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
Published by: सीकर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 10:19 PM IST
सार
Rajasthan News: सीकर के राजकीय जनाना अस्पताल में प्रसूता दीपा की मौत के बाद दूसरे दिन भी परिजनों और समाज के लोगों का धरना जारी रहा। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर कार्रवाई, आर्थिक सहायता, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम और मृतका के पति को नौकरी देने की मांग की है।
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इंजेक्शन के बाद प्रसूता की मौत पर बवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीकर के राजकीय जनाना अस्पताल में प्रसूता दीपा की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के दूसरे दिन शुक्रवार को भी परिजनों और समाज के लोगों ने अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना जारी रखा। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर वार्ता नहीं करता है तो आंदोलन को तेज करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।
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इंजेक्शन के बाद बिगड़ने का आरोप
धरने पर बैठे परिजनों का आरोप है कि दीपा को 20 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर राजकीय जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 21 जुलाई को उसने एक बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के बाद उसकी हालत सामान्य थी और उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। परिजनों का कहना है कि 22 जुलाई को दोपहर करीब एक बजे एक महिला नर्सिंगकर्मी द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उन्होंने तत्काल अस्पताल स्टाफ को इसकी जानकारी दी, लेकिन समय पर चिकित्सकीय उपचार नहीं मिला।
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रेफर करने में देरी का आरोप, रास्ते में बिगड़ी हालत
परिजनों का आरोप है कि जब मरीज की हालत लगातार खराब होती गई तो उन्होंने उसे बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग की, लेकिन कई घंटे तक केवल आश्वासन दिया जाता रहा। बाद में निजी एंबुलेंस से जयपुर के लिए रवाना किया गया, लेकिन रेफर पर्ची तक उपलब्ध नहीं कराई गई। रास्ते में स्थिति बिगड़ने पर परिजन वापस सीकर के एसके अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने दीपा को मृत घोषित कर दिया।
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कार्रवाई और मुआवजे की मांग
घटना के बाद से परिजन और समाज के लोग अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार चिकित्सकों व कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय तथा कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने मृतका के दोनों बच्चों के लिए 11-11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम, मृतका के पति लालचंद को संविदा नौकरी तथा जांच समिति में पीड़ित पक्ष के दो प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग भी रखी है।
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अस्पताल प्रशासन की चुप्पी
उधर, अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा।