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Sri Ganganagar: श्री गंगानगर पॉक्सो कोर्ट का फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को सुनाई 20 साल की सजा
Sat, 17 Aug 2024 08:37 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीगंगानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीगंगानगर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sat, 17 Aug 2024 08:37 PM IST
सार
पॉक्सो न्यायालय प्रथम ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और दुष्कर्म करने के दोषी पिंकू को 20 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
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दुष्कर्म के दोषी को सजा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नाबालिग को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के दोषी को कोर्ट ने 20 साल कारावास और जुमाने से दंडित किया है। यह निर्णय पॉक्सो न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश सुरेन्द्र खरे ने सुनाया।
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मामले के अनुसार पीड़िता के पिता ने सदर थाना में परिवाद पेश किया। इसमें बताया कि पिंकू नाबालिग को बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया। इससे पूर्व भी एक बार इस तरह की हरकत कर चुका है। इसके बाद नाबालिग को बड़ी मुश्किल से उत्तरप्रदेश से बरामद किया था। अब एक फिर वह नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। दोनों करीब एक माह से लापता है। पिंकू कि मां को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है, परन्तु वह नाबालिग बारे कोई जानकारी नहीं दे रही।
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पिछले 3-4 दिन से उनके नम्बर पर एक युवती का फोन आ रहा है। वह कह रही है कि अगर वह घर लौटती है तो उसे यह लोग जान से मार देंगे। इसके बाद फोन कट हो गया। पुलिस ने परिवाद के आधार पर मुकद्दमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पुलिस ने नाबालिग को दस्तयाब करने के साथ आरोपित पिंकू को गिरफ्तार किया। नाबालिग का मेडिकल करवाया गया। इसमें उसके साथ दुष्कर्म की पुष्टि होने पर प्रकरण में और धाराएं जोड़ते हुए आरोपित और उसकी मां के विरूद्ध सक्षम न्यायालय में चालान पेश किया।
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पॉक्सो न्यायालय प्रथम के विशिष्ठ लोक अभियोजक गुरचरण सिंह रूपाणा ने बताया कि न्यायालय ने प्रकरण का निस्तारण करते हुए पिंकू को न्यायालय ने धारा 366-363 में 5-5 साल कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने और धारा 5(एल)/6 में 20 साल कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, न्यायालय ने मुलजिम की मां को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने जुर्माना राशि जमा होने पर यह राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिलाने की अनुशंषा की है। सभी सजाएं साथ चलेगी।