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Udaipur: सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड अधिकारी से 68 लाख की ठगी, पति-पत्नी को 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदयपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 09:28 PM IST
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सार
Udaipur: ठगों ने फर्जी CBI अधिकारी, ASP और मजिस्ट्रेट बनकर उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी के साथ साइबर ठगी की है। ठगों ने पति-पत्नी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान उन्होंने दंपत्ति से करीब 68 लाख रुपए ऐंठ लिए।
उदयपुर सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड अधिकारी से 68 लाख की साइबर ठगी
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विस्तार
उदयपुर के सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड अधिकारी से 68 लाख की साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है. शहर के न्यू केशव नगर इलाके के डी रोड पर रहने वाले भरत व्यास, जो एमएलएसयू के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, और उनकी पत्नी आशा व्यास इस साइबर ठगी का शिकार हुए हैं। ठगों ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिए खुद को दिल्ली CBI का अधिकारी बताते हुए उन्हें डराया और अलग-अलग खातों में कुल 67 लाख 90 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
28 दिसंबर को आया ठगों का फोन
पीड़ित द्वारा साइबर थाना पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, 28 दिसंबर 2025 को भरत व्यास के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। जिसमें कहा गया कि उनके नाम पर शिकायत दर्ज है। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल पर एक व्यक्ति ने खुद को दिल्ली CBI से खुद को अफसर लक्ष्मण बताया और कहा कि उनका मनी लॉन्ड्रिंग केस में नरेश नामक व्यक्ति से 20 लाख रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है।
ASP और मजिस्ट्रेट बनकर धमकी
कुछ देर बाद कॉल में समाधान पंवार नामक व्यक्ति को जोड़ा गया, जिसने खुद को CBI दिल्ली ब्रांच का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) बताया। उसने भरत व्यास और उनकी पत्नी से संपत्ति, बैंक बैलेंस और जेवरात की पूरी जानकारी ली और कोर्ट में पेश करने की धमकी दी। इसके बाद एक व्यक्ति को मजिस्ट्रेट बताकर कॉल में जोड़ा गया, जिसने कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है और दोषी पाए गए हैं। मजिस्ट्रेट ने जमानत के नाम पर बैंक बैलेंस और जेवरों की कुल 11.90 लाख रुपए की राशि तुरंत कोर्ट के बताए गए बैंक खाते में जमा कराने को कहा।
12 दिन डिजिटल अरेस्ट, किस्तों में रकम ट्रांसफर
गिरफ्तारी के डर और वरिष्ठ नागरिक होने के चलते भरत व्यास और उनकी पत्नी ने ठगों के बताए खातों में पैसे जमा करा दिए। इस दौरान ठगों ने उन्हें 28 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक दोनों को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान ठगों ने अलग-अलग किस्तों में 5.50 लाख, 9 लाख, 20 लाख, 20 लाख, 2 लाख और 6.40 लाख रुपये कुल 67.90 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए।
ये भी पढ़ें: कन्हैयालाल के परिवार को अब तक क्यों नहीं मिला न्याय? अमित शाह के राजस्थान दौरे पर गहलोत का निशाना
मानसिक रूप से टूटे
साइबर ठगी के पीड़ित भरत व्यास ने बताया कि इस घटना के बाद वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। ठगी की रकम चुकाने के लिए उन्होंने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लिया था, जिसे लौटाने को लेकर वे गहरे तनाव में हैं। वही पुलिस अधिकारी डीएसपी विनय चौधरी ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज की गयी है। साइबर ठगी के इस प्रकरण की गहन जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
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28 दिसंबर को आया ठगों का फोन
पीड़ित द्वारा साइबर थाना पुलिस में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, 28 दिसंबर 2025 को भरत व्यास के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। जिसमें कहा गया कि उनके नाम पर शिकायत दर्ज है। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल पर एक व्यक्ति ने खुद को दिल्ली CBI से खुद को अफसर लक्ष्मण बताया और कहा कि उनका मनी लॉन्ड्रिंग केस में नरेश नामक व्यक्ति से 20 लाख रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है।
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ASP और मजिस्ट्रेट बनकर धमकी
कुछ देर बाद कॉल में समाधान पंवार नामक व्यक्ति को जोड़ा गया, जिसने खुद को CBI दिल्ली ब्रांच का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) बताया। उसने भरत व्यास और उनकी पत्नी से संपत्ति, बैंक बैलेंस और जेवरात की पूरी जानकारी ली और कोर्ट में पेश करने की धमकी दी। इसके बाद एक व्यक्ति को मजिस्ट्रेट बताकर कॉल में जोड़ा गया, जिसने कहा कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है और दोषी पाए गए हैं। मजिस्ट्रेट ने जमानत के नाम पर बैंक बैलेंस और जेवरों की कुल 11.90 लाख रुपए की राशि तुरंत कोर्ट के बताए गए बैंक खाते में जमा कराने को कहा।
12 दिन डिजिटल अरेस्ट, किस्तों में रकम ट्रांसफर
गिरफ्तारी के डर और वरिष्ठ नागरिक होने के चलते भरत व्यास और उनकी पत्नी ने ठगों के बताए खातों में पैसे जमा करा दिए। इस दौरान ठगों ने उन्हें 28 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026 तक दोनों को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान ठगों ने अलग-अलग किस्तों में 5.50 लाख, 9 लाख, 20 लाख, 20 लाख, 2 लाख और 6.40 लाख रुपये कुल 67.90 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए।
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मानसिक रूप से टूटे
साइबर ठगी के पीड़ित भरत व्यास ने बताया कि इस घटना के बाद वे मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। ठगी की रकम चुकाने के लिए उन्होंने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लिया था, जिसे लौटाने को लेकर वे गहरे तनाव में हैं। वही पुलिस अधिकारी डीएसपी विनय चौधरी ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज की गयी है। साइबर ठगी के इस प्रकरण की गहन जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।