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Rajasthan News: डबल इंजन सरकार पर वृंदा करात का सीधा प्रहार, बोलीं- आदिवासियों के खिलाफ चल रहा अघोषित युद्ध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदयपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Feb 2026 07:52 AM IST
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सार
उदयपुर के गुजराती समाज भवन में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक हुई, जिसमें 13 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने की।
वृंदा करात
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शहर के गुजराती समाज भवन में रविवार को आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने की। देश के 13 राज्यों से आए आदिवासी प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। बैठक में आरोप लगाया गया कि मौजूदा सरकारें कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर कर रही हैं।
वृंदा करात का सरकार पर सीधा हमला
उदयपुर पहुंची भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने आदिवासियों के खिलाफ अघोषित युद्ध छेड़ रखा है।
बजट और जनगणना पर उठे सवाल
जितेंद्र चौधरी ने केंद्र सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में आदिवासियों की आबादी 8.6 प्रतिशत है, लेकिन बजट में उनका हिस्सा केवल 2.58 प्रतिशत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से मंजूर बजट भी पूरा खर्च नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि आने वाली जनगणना में आदिवासियों की अलग पहचान और उनकी आस्था के लिए अलग कॉलम रखा जाए। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मनरेगा की जगह लाई गई नई व्यवस्था कम बजट के कारण 125 दिन का रोजगार देने में सफल नहीं होगी।
राजस्थान में आरक्षण और विस्थापन का मुद्दा
वृंदा करात ने राजस्थान की डबल इंजन सरकार पर आरोप लगाया कि यहां आदिवासियों के खिलाफ अघोषित युद्ध चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रथम, द्वितीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों में आरक्षण नीति का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिये आदिवासियों को उनके अधिकारों से दूर किया जा रहा है।
उन्होंने जबरन विस्थापन का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में परमाणु बिजली घर, बांध और सड़क परियोजनाओं के नाम पर बिना सही मुआवजा और ग्राम सभा की मंजूरी के आदिवासियों को हटाया जा रहा है। झाड़ोल के अम्बासा गांव की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने वन विभाग की कार्रवाई को अमानवीय बताया।
अरावली और पहचान का सवाल
राष्ट्रीय संयोजक पुलिन बास्की ने कहा कि सरकार बुलडोजर नीति के जरिये आदिवासियों की पहचान मिटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने भारत अमेरिका व्यापार समझौते से आदिवासी किसानों को नुकसान होने की आशंका भी जताई। आदिवासी जनाधिकार एका मंच के अध्यक्ष दुलीचंद ने अरावली पर्वतमाला में खनन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं है, बल्कि आदिवासियों के जीवन, संस्कृति और आत्मसम्मान का आधार है।
बैठक में पारित हुए प्रस्ताव
बैठक में आदिवासी अधिकारों की रक्षा, बजट बढ़ाने, आरक्षण नीति का पालन करने और विस्थापन पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और कई राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वृंदा करात ने अपने भाषण में डबल इंजन सरकार को जमकर कोसा और आदिवासियों के हक की लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया।
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वृंदा करात का सरकार पर सीधा हमला
उदयपुर पहुंची भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार ने आदिवासियों के खिलाफ अघोषित युद्ध छेड़ रखा है।
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बजट और जनगणना पर उठे सवाल
जितेंद्र चौधरी ने केंद्र सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश में आदिवासियों की आबादी 8.6 प्रतिशत है, लेकिन बजट में उनका हिस्सा केवल 2.58 प्रतिशत है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से मंजूर बजट भी पूरा खर्च नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि आने वाली जनगणना में आदिवासियों की अलग पहचान और उनकी आस्था के लिए अलग कॉलम रखा जाए। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मनरेगा की जगह लाई गई नई व्यवस्था कम बजट के कारण 125 दिन का रोजगार देने में सफल नहीं होगी।
राजस्थान में आरक्षण और विस्थापन का मुद्दा
वृंदा करात ने राजस्थान की डबल इंजन सरकार पर आरोप लगाया कि यहां आदिवासियों के खिलाफ अघोषित युद्ध चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रथम, द्वितीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों में आरक्षण नीति का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिये आदिवासियों को उनके अधिकारों से दूर किया जा रहा है।
उन्होंने जबरन विस्थापन का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में परमाणु बिजली घर, बांध और सड़क परियोजनाओं के नाम पर बिना सही मुआवजा और ग्राम सभा की मंजूरी के आदिवासियों को हटाया जा रहा है। झाड़ोल के अम्बासा गांव की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने वन विभाग की कार्रवाई को अमानवीय बताया।
अरावली और पहचान का सवाल
राष्ट्रीय संयोजक पुलिन बास्की ने कहा कि सरकार बुलडोजर नीति के जरिये आदिवासियों की पहचान मिटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने भारत अमेरिका व्यापार समझौते से आदिवासी किसानों को नुकसान होने की आशंका भी जताई। आदिवासी जनाधिकार एका मंच के अध्यक्ष दुलीचंद ने अरावली पर्वतमाला में खनन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं है, बल्कि आदिवासियों के जीवन, संस्कृति और आत्मसम्मान का आधार है।
बैठक में पारित हुए प्रस्ताव
बैठक में आदिवासी अधिकारों की रक्षा, बजट बढ़ाने, आरक्षण नीति का पालन करने और विस्थापन पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित किए गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और कई राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वृंदा करात ने अपने भाषण में डबल इंजन सरकार को जमकर कोसा और आदिवासियों के हक की लड़ाई जारी रखने का आह्वान किया।