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Shimla News: जिले में 119 नए एचआईवी पॉजिटिव मामले मिले, 4 माह 17 नए केस
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एक ही सिरिंज से नशे का सेवन करने पर एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और सी की गिरफ्त में आ रहे युवा
बच्चों में भी बढ़ रहे हेपेटाइटिस-बी और सी के मामले
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नशे के सेवन के लिए एक ही सिरिंज के इस्तेमाल से युवाओं में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामले बढ़ रहे हैं।
जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में एचआईवी संक्रमण के 119 नए मामले सामने आए हैं। इनमें 88 पुरुष, 30 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर शामिल हैं, जबकि अप्रैल से जून के बीच 17 नए मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 12 पुरुष, तीन महिलाएं और दो ट्रांसजेंडर शामिल हैं। यह जानकारी मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा, जिला सामुदायिक संसाधन समूह और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है। सिरिंज साझा करने से एचआईवी तेजी से फैल रहा है। बच्चों में भी हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामले बढ़ रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों पर नजर रखें कि उनके पास सिरिंज या नशीले पदार्थ तो नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एचआईवी का समय पर पता चलने और उचित इलाज से संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है। बैठक में जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तहसीन ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन का अनुमानित लक्ष्य 546 एचआईवी संक्रमित लोगों का है। इनमें से 441 लोगों की पहचान हो चुकी है, जबकि 105 लोगों की पहचान अभी बाकी है। ऐसे मरीजों की पहचान के लिए जिले में 729 एचआईवी टेस्ट किए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में सात इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) कार्यरत हैं। नशे को एक बीमारी मानते हुए परिवार और समाज को प्रभावित युवाओं को पूरा सहयोग देना चाहिए।
आईजीएमसी में चल रहा ओएसटी केंद्र : डॉ. यशपाल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने बताया कि आईजीएमसी में संचालित ओएसटी केंद्र चिट्टा, हेरोइन और स्मैक जैसी लत से ग्रस्त लोगों के लिए चिकित्सकीय परामर्श, मनोसामाजिक सहायता और प्रतिस्थापन दवाएं उपलब्ध कराता है। यह केंद्र एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक है, क्योंकि इससे इंजेक्शन के माध्यम से नशा लेने की आदत कम होती है। सभी सेवाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, स्पार्क एनजीओ की दीपिका विमल, मेडिकल अफसर डॉ. भारती, आशी संस्था के प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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बच्चों में भी बढ़ रहे हेपेटाइटिस-बी और सी के मामले
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नशे के सेवन के लिए एक ही सिरिंज के इस्तेमाल से युवाओं में एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामले बढ़ रहे हैं।
जिले में पिछले वित्तीय वर्ष में एचआईवी संक्रमण के 119 नए मामले सामने आए हैं। इनमें 88 पुरुष, 30 महिलाएं और एक ट्रांसजेंडर शामिल हैं, जबकि अप्रैल से जून के बीच 17 नए मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 12 पुरुष, तीन महिलाएं और दो ट्रांसजेंडर शामिल हैं। यह जानकारी मोबिलाइजेशन फॉर एड्स सुरक्षा, जिला सामुदायिक संसाधन समूह और जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की संयुक्त समीक्षा बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने की।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है। सिरिंज साझा करने से एचआईवी तेजी से फैल रहा है। बच्चों में भी हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी के मामले बढ़ रहे हैं। अभिभावक अपने बच्चों पर नजर रखें कि उनके पास सिरिंज या नशीले पदार्थ तो नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एचआईवी का समय पर पता चलने और उचित इलाज से संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है। बैठक में जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तहसीन ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन का अनुमानित लक्ष्य 546 एचआईवी संक्रमित लोगों का है। इनमें से 441 लोगों की पहचान हो चुकी है, जबकि 105 लोगों की पहचान अभी बाकी है। ऐसे मरीजों की पहचान के लिए जिले में 729 एचआईवी टेस्ट किए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में सात इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) कार्यरत हैं। नशे को एक बीमारी मानते हुए परिवार और समाज को प्रभावित युवाओं को पूरा सहयोग देना चाहिए।
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आईजीएमसी में चल रहा ओएसटी केंद्र : डॉ. यशपाल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने बताया कि आईजीएमसी में संचालित ओएसटी केंद्र चिट्टा, हेरोइन और स्मैक जैसी लत से ग्रस्त लोगों के लिए चिकित्सकीय परामर्श, मनोसामाजिक सहायता और प्रतिस्थापन दवाएं उपलब्ध कराता है। यह केंद्र एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में भी सहायक है, क्योंकि इससे इंजेक्शन के माध्यम से नशा लेने की आदत कम होती है। सभी सेवाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, स्पार्क एनजीओ की दीपिका विमल, मेडिकल अफसर डॉ. भारती, आशी संस्था के प्रतिनिधि सहित अन्य अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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