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Shimla News: साढ़े पांच किलो चरस तस्करी के मामले में 12 साल की कैद
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विशेष न्यायाधीश-एक शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत का फैसला, बैग में चरस ले जाता पकड़ा था उत्तराखंड निवासी
दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला शिमला के चिड़गांव थाना क्षेत्र में चरस तस्करी मामले में अदालत ने दोषी को 12 साल कैद की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश-एक (एनडीपीएस) शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने 5.530 किलोग्राम चरस तस्करी के मामले में मुख्य आरोपी सोहन दास के खिलाफ यह फैसला सुनाया है। कारावास के साथ दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। सह-आरोपी राज मोहन के खिलाफ ठोस सबूत और आपराधिक साजिश साबित न होने पर अदालत ने उसे बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 23 अक्तूबर 2024 को पुलिस थाना चिड़गांव के तत्कालीन अन्वेषण अधिकारी अपनी टीम के साथ रोहडू, चिड़गांव और डोडरा क्वार क्षेत्र में गश्त पर थे।
गुप्त सूचना के आधार पर गोसांगो पुल के पास पुलिस टीम ने पैदल जा रहे उत्तराखंड निवासी आरोपी राज मोहन और दोषी सोहन दास को रोका। तलाशी के दौरान उत्तराखंड निवासी दोषी सोहन दास के पास मौजूद काले रंग के बैग से 5.530 किलोग्राम चरस, एक इलेक्ट्रॉनिक तराजू और तीन बाट (दो 200-200 ग्राम और एक 100 ग्राम का) बरामद हुए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 24 गवाहों के बयान दर्ज कराए और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि मामले में जब्ती से लेकर सीलिंग, री-सीलिंग और एसएफएसएल जुन्गा तक भेजने की पूरी प्रक्रिया में नियमों का पूरी तरह पालन हुआ।
एसएफएसएल की रिपोर्ट से यह प्रमाणित हो गया कि जब्त पदार्थ चरस ही था। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में प्रमुख तर्क और आपत्तियां रखीं। सजा पर बहस के दौरान मुख्य आरोपी सोहन दास के वकील ने दलील दी कि दोषी परिवार का इकलौता कमाने वाला और पहली बार अपराध में पकड़ा गया है। इसलिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सजा कम की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाहों ने दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर और मौके पर पुलिस तथा बैग की मौजूदगी की बात स्वीकार की है। अदालत ने माना कि 5.530 किलोग्राम चरस सीधे तौर पर आरोपी सोहन दास के कब्जे वाले बैग से बरामद हुई थी। आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि वह इस मामले में निर्दोष था।
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दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
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शिमला। जिला शिमला के चिड़गांव थाना क्षेत्र में चरस तस्करी मामले में अदालत ने दोषी को 12 साल कैद की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश-एक (एनडीपीएस) शिमला प्रवीण गर्ग की अदालत ने 5.530 किलोग्राम चरस तस्करी के मामले में मुख्य आरोपी सोहन दास के खिलाफ यह फैसला सुनाया है। कारावास के साथ दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। सह-आरोपी राज मोहन के खिलाफ ठोस सबूत और आपराधिक साजिश साबित न होने पर अदालत ने उसे बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार 23 अक्तूबर 2024 को पुलिस थाना चिड़गांव के तत्कालीन अन्वेषण अधिकारी अपनी टीम के साथ रोहडू, चिड़गांव और डोडरा क्वार क्षेत्र में गश्त पर थे।
गुप्त सूचना के आधार पर गोसांगो पुल के पास पुलिस टीम ने पैदल जा रहे उत्तराखंड निवासी आरोपी राज मोहन और दोषी सोहन दास को रोका। तलाशी के दौरान उत्तराखंड निवासी दोषी सोहन दास के पास मौजूद काले रंग के बैग से 5.530 किलोग्राम चरस, एक इलेक्ट्रॉनिक तराजू और तीन बाट (दो 200-200 ग्राम और एक 100 ग्राम का) बरामद हुए थे। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 24 गवाहों के बयान दर्ज कराए और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा। अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि मामले में जब्ती से लेकर सीलिंग, री-सीलिंग और एसएफएसएल जुन्गा तक भेजने की पूरी प्रक्रिया में नियमों का पूरी तरह पालन हुआ।
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एसएफएसएल की रिपोर्ट से यह प्रमाणित हो गया कि जब्त पदार्थ चरस ही था। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में प्रमुख तर्क और आपत्तियां रखीं। सजा पर बहस के दौरान मुख्य आरोपी सोहन दास के वकील ने दलील दी कि दोषी परिवार का इकलौता कमाने वाला और पहली बार अपराध में पकड़ा गया है। इसलिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सजा कम की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाहों ने दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर और मौके पर पुलिस तथा बैग की मौजूदगी की बात स्वीकार की है। अदालत ने माना कि 5.530 किलोग्राम चरस सीधे तौर पर आरोपी सोहन दास के कब्जे वाले बैग से बरामद हुई थी। आरोपी यह साबित करने में विफल रहा कि वह इस मामले में निर्दोष था।
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