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Himachal News : खतरनाक सांपों के जहर का असरदार तोड़ खोजेगा एम्स बिलासपुर, एंटीवेनम पर शुरू होगा विशेष शोध

Wed, 12 Aug 2026 11:27 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 12 Aug 2026 11:27 AM IST
सार

एम्स बिलासपुर के जैव रसायन विभाग में बिग फोर भारतीय सांपों के जहर पर विशेष शोध परियोजना शुरू होने जा रही है। आईसीएमआर ने परियोजना को मंजूरी दी है। शोध में जहर में मौजूद बहुआयामी विषैले टॉक्सिन को लक्ष्य कर रिकॉम्बिनेंट पॉलीवैलेंट एंटीवेनम विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। परियोजना के लिए वरिष्ठ परियोजना सहायक के एक पद पर भर्ती होगी और इच्छुक अभ्यर्थी 21 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे।

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एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

एम्स बिलासपुर देश के सबसे जहरीले सांपों के जहर का असरदार तोड़ (एंटीवेनम) विकसित करने के लिए विशेष शोध परियोजना पर काम शुरू करने जा रहा है। एम्स के जैव रसायन विभाग में देश के बिग फोर सांपों के जहर में मौजूद बहुआयामी विषैले टॉक्सिन को लक्ष्य कर नई रिकॉम्बिनेंट पॉलीवैलेंट एंटीवेनम विकसित करने की दिशा में अध्ययन होगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने शोध परियोजना को मंजूरी दी है। परियोजना का आधिकारिक नाम डेवलपमेंट ऑफ न्यू रिकॉम्बिनेंट पॉलीवैलेंट एंटीवेनम टारगेटिंग मल्टीफंक्शनल टॉक्सिन्स ऑफ द बिग फोर इंडियन स्नेक्स है।

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परियोजना के प्रधान अन्वेषक विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुराग सांख्यान हैं। शोध परियोजना में बिग फोर भारतीय सांपों के जहर में मौजूद विभिन्न विषैले घटकों का अध्ययन किया जाएगा। विशेष रूप से बहुआयामी विषैले टॉक्सिन पर ध्यान दिया जाएगा। परियोजना के तहत रिकॉम्बिनेंट तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पॉलीवैलेंट एंटीवेनम विकसित करने की संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन होगा। 
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सांप के जहर में अलग-अलग प्रकार के विषैले घटक पाए जाते हैं, जो शरीर पर विभिन्न प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में कई विषैले घटकों को लक्ष्य करने वाली एंटीवेनम विकसित करने की दिशा में होने वाला शोध सांप के काटने के उपचार के क्षेत्र में नई वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध करा सकता है। परियोजना में प्रयोगशाला आधारित आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। 
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अधिसूचना में पीसीआर, एलिसा, कोशिका संवर्धन और जीवाणु संवर्धन जैसी तकनीकों में व्यावहारिक अनुभव को वांछनीय योग्यता में शामिल किया गया है। इसके अलावा आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण और प्रबंधन और रिपोर्ट लेखन की क्षमता को भी प्राथमिकता दी जाएगी। भारत में बिग फोर के नाम से चार प्रमुख विषैले सांपों को जाना जाता है। इनमें कोबरा, सामान्य करैत, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। हालांकि एम्स बिलासपुर की ओर से जारी अधिसूचना में इन चारों सांपों के नाम अलग-अलग नहीं दिए गए हैं। परियोजना के आधिकारिक नाम में सामूहिक रूप से ‘बिग फोर’ भारतीय सांपों का उल्लेख किया गया है। 

परियोजना का केंद्र नई रिकॉम्बिनेंट पॉलीवैलेंट एंटीवेनम विकसित करने की दिशा में शोध करना है। इसके तहत सांप के जहर में मौजूद बहुआयामी विषैले टॉक्सिन और उन्हें लक्ष्य करने की रणनीति का अध्ययन किया जाएगा। शोध से अधिक लक्षित एंटीवेनम विकसित करने की दिशा में आधार तैयार होने की उम्मीद है।

शोध के लिए होगी नियुक्ति
इस परियोजना के लिए एम्स बिलासपुर के जैव रसायन विभाग में वरिष्ठ परियोजना सहायक का एक पद भरा जाएगा। इसके लिए किसी मान्यता प्राप्त विवि से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री अनिवार्य है। अभ्यर्थी की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच हो। जीवन विज्ञान से संबंधित विषय में स्नातकोत्तर डिग्री और आणविक जीव विज्ञान की तकनीकों में व्यावहारिक अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 21 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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