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Himachal News: एम्स बिलासपुर में गंभीर बीमारियों की जांच होगी और सटीक, आधुनिक मशीन की खरीद प्रक्रिया शुरू

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 14 May 2026 10:11 AM IST
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सार

एम्स बिलासपुर आधुनिक लिक्विड क्रोमैटोग्राफी टेंडेम मास स्पेक्ट्रोमेट्री मशीन स्थापित करने जा रहा है। यह मशीन सामान्य लैब टेस्टिंग से कई गुना ज्यादा एडवांस है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को मिलेगा जो लंबे समय से हार्मोनल असंतुलन, बांझपन, थायराइड की जटिल समस्याओं और मेटाबॉलिक विकारों से जूझ रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
 

AIIMS Bilaspur to conduct diagnostics for serious ailments procurement process for advanced
एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एम्स बिलासपुर अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा करते हुए जल्द ही चिकित्सा जगत की बेहद आधुनिक लिक्विड क्रोमैटोग्राफी टेंडेम मास स्पेक्ट्रोमेट्री मशीन स्थापित करने जा रहा है। करोड़ों की लागत वाली यह मशीन एम्स के एंडोक्रिनोलॉजी  विभाग में लगाई जाएगी। संस्थान ने ग्लोबल टेंडर जारी कर दिए हैं।

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इस सुविधा के शुरू होने से न केवल हिमाचल, बल्कि पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती जिलों के मरीजों को भी पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। यह मशीन सामान्य लैब टेस्टिंग से कई गुना ज्यादा एडवांस है। इसका सबसे बड़ा फायदा उन मरीजों को मिलेगा जो लंबे समय से हार्मोनल असंतुलन, बांझपन, थायराइड की जटिल समस्याओं और मेटाबॉलिक विकारों से जूझ रहे हैं। अक्सर इन बीमारियों में रक्त के भीतर मौजूद तत्वों की मात्रा इतनी कम होती है कि सामान्य मशीनें उन्हें पकड़ नहीं पातीं, लेकिन एलसीएमएस तकनीक नैनोग्राम स्तर तक की सूक्ष्मता से जांच कर सटीक रिपोर्ट देती है। शरीर में दवाओं के असर और विषैले तत्वों की जांच में भी मशीन मददगार होगी। 
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मशीन के आने से टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के जटिल मामलों व एड्रिनल ग्रंथि और पिट्यूटरी ग्रंथि से जुड़ी बीमारियों का इलाज आसान होगा। कैंसर के मरीजों के लिए बायो-मार्कर की पहचान करने में मशीन मददगार है, जिससे डॉक्टर यह तय कर पाएंगे कि कीमोथेरेपी या दवाओं का कितना असर हो रहा है।

बच्चों की अनुवांशिक बीमारियों की हो सकेगी पहचान
बच्चों में होने वाली दुर्लभ अनुवांशिक और जन्मजात बीमारियों की पहचान अब बिलासपुर में ही संभव होगी। न्यूरो और किडनी के मरीजों में चल रही दवाओं का शरीर पर सटीक असर देखा जा सकेगा। एम्स के डॉक्टरों को जटिल शोध कार्यों में अंतरराष्ट्रीय स्तर का डेटा मिल सकेगा।

अत्याधुनिक तरीके से होगी नसों की बारीक जांच
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में तंत्रिका तंत्र और नसों से जुड़ी गंभीर बीमारियों की जांच पहले से कहीं अधिक सटीक और आधुनिक तरीके से हो सकेगी। संस्थान ने अत्याधुनिक मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभी तक क्षेत्र के अधिकांश मरीजों को हाथ-पैर सुन्न होना, नसों में झनझनाहट, मांसपेशियों की कमजोरी, रीढ़ से जुड़ी नसों के दबाव और बच्चों में जन्मजात तंत्रिका विकारों की जांच के लिए बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था।
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