HP Cardboard Prices: हिमाचल में पांच रुपये तक बढ़े गत्ते के दाम, कार्टन महंगा होने के आसार
प्रदेश के गत्ता फैक्ट्रियों को चार से पांच रुपये पेपर महंगा मिल रहा है। अमेरिका व ईरान के युद्ध के दौरान पहले ही गत्ता संचालकों ने डिब्बों के दाम 8 से 10 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। ऐसे में अब उपभोक्ता दाम बढ़ाने को भी तैयार नहीं है।
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उत्तर प्रदेश की पेपर मिल बंद होने से पेपर महंगा हो गया है। प्रदेश के गत्ता फैक्ट्रियों को चार से पांच रुपये पेपर महंगा मिल रहा है। अमेरिका व ईरान के युद्ध के दौरान पहले ही गत्ता संचालकों ने डिब्बों के दाम 8 से 10 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं। ऐसे में अब उपभोक्ता दाम बढ़ाने को भी तैयार नहीं है। उद्योगपतियों को पुराने ऑर्डर पूरे करने कठिन हो गए हैं। वहीं अब गत्ता पैकिंग वाले सामान के भी दाम बढ़ सकते हैं क्योंकि पैकिंग का गत्ता भी महंगा हो रहा है। प्रदेश में 300 के करीब गत्ता उद्योग हैं। इन उद्योगों में 20 हजार युवाओं को रोजगार मिला हुआ है और इतने ही लोगों को अप्रत्यक्ष रूप में रोजगार मिला है।
कुछ माह पहले खाड़ी युद्ध के चलते गत्ता संचालकों ने गत्ते के डिब्बे के दाम 8 से 10 फीसदी बढ़ा दिए हैं। सेब के कार्टन 55 से 65 रुपये के बीच में बिक रहा था। इन गत्ता उद्योगों को हिमाचल, पंजाब व यूपी से पेपर आता है। यूपी से सबसे अधिक 70 फीसदी पेपर आता है। जबकि हिमाचल व पंजाब की पेपर मिलों से 30 फीसदी ही पेपर आता है। पिछले 15 दिन से कांवड़ यात्रा शुरू होने से मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर की पेपर मिलें बंद हैं। इन मिलों के बंद होने से डिस्पेच का कार्य पूरी तरह से रुक गया है। पेपर की मांग बढ़ते ही पंजाब व हिमाचल के पेपर मिलों ने भी कच्चे माल के दाम बढ़ा दिए हैं।
इस वर्ष सेब सीजन में प्लास्टिक के क्रेट लगने से पहले ही गत्ता उद्योग घाटे में चला गया है। जहां पर चार करोड़ रुपये सेब सीजन में डिब्बे लगते थे वहीं अब इस साल एक से डेढ़ करोड़ डिब्बे लगने की उम्मीद है। सारा काम प्लास्टिक क्रेट ने ले लिया है। वहीं कांवड़ यात्रा ने भी रही सही कसर पूरी कर दी है। उद्योगपतियों को कामगारों को वेतन निकालना कठिन हो गया है। यह यात्रा अभी 14 अगस्त तक चलनी है। गत्ता उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष मुकेश जैन ने कहा कि प्रदेश का गत्ता उद्योग मंदी की मार झेल रहा है। सेब सीजन पिटने के बाद अब कांवड़ यात्रा के चलते यूपी की पेपर मिलें बंद हो गई हैं। जिससे यूपी के गत्ते के डिब्बे में लगने वाला पेपर न आने से पंजाब व हिमाचल के पेपर मिलों पर गत्ता उद्योग आश्रित हो गया।
लेकिन बढ़ती मांग को देख कर पेपर के चार से पांच रुपये किलो बढ़ा दिए हैं। गत्ता संचालक कुछ माह पहले ही अपने डिब्बों के दाम बढ़ा चुका है और लगातार दाम बढ़ने के हक में भी नहीं है। केंद्र ने गत्ते के डिब्बे पर जीएसटी को पांच फीसदी कर रखा है और पेपर पर 18 फीसदी है। 13 फीसदी का लंबा गैप बना हुआ है। इसके अलावा गत्ते के डिब्बे के ग्राहक उद्योग 60 से 90 दिन के भीतर ही डिब्बे का भुगतान करते हैं। ऐसे में एक करोड़ का एक माह में व्यापार करने वाले उद्योगपति को 40 लाख रुपये अतिरिक्त अपने पास रखना पड़ेगा तभी वह प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बाजार में टिक पाएगा। जीएसटी का रिफंड व डिब्बे का भुगतान भी तीन माह के बाद ही होता है