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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Timeline: Road accidents claim precious lives every year; here is a look at the biggest accidents in Himachal

Timeline: निजी बस दुर्घटनाग्रस्त होने से चंबा में गई सात की जान, जानें हिमाचल में कब-कब हुए बड़े सड़क हादसे

Sat, 08 Aug 2026 11:57 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 08 Aug 2026 11:57 AM IST
सार

बरसात के मौसम में प्रदेश की पहाड़ी सड़कें यात्रियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाती हैं। शनिवार को चंबा जिले में तीसा-बैरागढ़ मार्ग पर चालुज मोड़ के पास यात्रियों से भरी निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई।  इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई। 

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Timeline: Road accidents claim precious lives every year; here is a look at the biggest accidents in Himachal
चंबा बस हादसा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में हर साल सड़क हादसे अनमोल जिंदगियां छीन रहे हैं। तीसा-बैरागढ़ मुख्य सड़क पर शनिवार सुबह करीब सात बजे चलुंज मोड़ के समीप एक निजी बस स्टीयरिंग एंड टूटने से अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरी। हादसे में चालक और परिचालक सहित सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल हो गए हैं। तीसा अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों को मेडिकल कॉलेज चंबा रेफर किया गया है। बाद में तीन गंभीर घायलों को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया है। आठ चंबा मेडिकल कॉलेज में ही भर्ती हैं। निजी बस संख्या एचपी-7ए-2101 बैरागढ़ से 18 सवारियां लेकर चंबा की ओर जा रही थी।  बता दें, बरसात के मौसम में प्रदेश की पहाड़ी सड़कें यात्रियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाती हैं। भूस्खलन, पहाड़ियों से गिरते पत्थर, सड़क धंसना और गहरी खाइयां हर साल दर्जनों लोगों की जान ले रही हैं। 

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मृतकों की सूची

  • जगदेव शर्मा (50) पुत्र धर्म सिंह, निवासी गांव बहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
  • देस राज (35) पुत्र त्रिलोचन, निवासी गांव बहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
  • तेज सिंह (39) पुत्र प्यारे लाल, परिचालक, निवासी गांव सत्यास, डाकघर तरेला, तहसील चुराह।
  • जगदेई (24) पुत्री हरि लाल, निवासी गांव बाहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
  • हरदेई (43) पत्नी जगदेव, निवासी गांव बाहला, डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
  • नीलम (34) पत्नी मोती सिंह, निवासी डाकघर देवीकोठी, तहसील चुराह।
  • रूप सिंह (35) पुत्र राधा राम, चालक, निवासी गांव चिल्ली, डाकघर थल्ली, तहसील चुराह।
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हिमाचल के अब तक के सबसे बड़े जानलेवा हादसे

  • 24 जुलाई 2026 को कुल्लू से पांगी जा रही एक टैक्सी पहाड़ी दरकने से मलबे की चपेट में आ गई, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई।
  • 18 जून 2026 को चंबा के मसरूंड में करीब 500 मीटर गहरी खाई में बोलेरो गाड़ी गिरने से सात लोगों की जान चली गई।
  • 11 मई 2026 को ककीरा (चंबा-नूरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग) में पर्यटकों से भरी इनोवा दुर्घटनाग्रस्त होने से छह लोगों की मौत हुई।
  • 4 मई 2026 को सिरमौर में कार खाई में गिरने से चार लोगों की जान गई।
  • 9 जनवरी 2026 को सिरमौर के शिलाई-कुपवी मार्ग पर निजी बस 500 मीटर गहरी खाई में गिरने से 13 लोगों की मौत हुई थी।
  • 20 जून 2024 को शिमला जिले के जुब्बल स्थित चोरी कैंची में एचआरटीसी बस पलटने से चार लोगों की मौत हुई थी।
  • 20 जून 2017 को शिमला के नेरवा में एचआरटीसी बस हादसे में 44 यात्रियों की जान गई थी।
  • 13 अगस्त 2013 को चंबा के चुवाड़ी में निजी बस दुर्घटना में 41 लोगों की मौत हुई थी।
  • 3 अक्तूबर 2012 को मंडी के जोगिंद्रनगर में बस खाई में गिरने से 46 लोगों की मौत हुई।
  • 5 नवंबर 2012 को किन्नौर के टापरी के पास बस के सतलुज नदी में समा जाने से 42 लोगों की जान चली गई।
  • 2 जनवरी 2010 को बिलासपुर में निजी बस हादसे में 31 लोगों की जान गई थी।

 

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चांजू बस दुर्घटना की होगी मैजिस्ट्रेट जांच, एडीएम चंबा ने दिए निर्देश
 चांजू में हुए बस हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए गए हैं। एडीएम चंबा अमित मेहरा ने हादसे के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए संबंधित एसडीएम चुराह को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तैयार कर जिला प्रशासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। मजिस्ट्रेट जांच के दौरान हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। इसमें दुर्घटना के संभावित कारणों, परिस्थितियों और संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाई जाएगी। अधिकारियों को जांच प्रक्रिया पूरी गंभीरता और समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा गया है। प्रशासन की ओर से हादसे में प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता मुहैया करवाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। तहसीलदार चुराह को निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व विभाग के कर्मचारी प्रभावित परिवारों से संपर्क कर उन्हें नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि घरद्वार जाकर उपलब्ध करवाएं। जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट निर्धारित अवधि में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, जिससे हादसे के कारणों का पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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