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चेस्टर हिल: नियम ताक पर रख निर्माण; नाले में मलबा, घासनियों को जाने वाले रास्ते बंद; लोगों के कई आरोप
राकेश शर्मा, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 21 Apr 2026 10:44 AM IST
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सार
सोलन शहर के साथ सटे चेस्टर हिल आवासीय प्रोजेक्ट निर्माण ने स्थानीय लोगों को भी मुश्किल में डाल दिया है। चेस्टर हिल के प्रोजेक्ट के साथ लगती पड़ग पंचायत के बेर गांव के लोगों की घासनियों को जाने वाले रास्ते भी प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ गए। पढ़ें पूरी खबर...
घासनियों में मजदूर गंदगी न फैलाएं इसलिए की गई बाड़बंदी। दूसरी ओर नाले में डंप किया गया निर्माण कार्य का मलबा।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
सोलन शहर के साथ सटे चेस्टर हिल आवासीय प्रोजेक्ट निर्माण में न केवल नियमों का उल्लंघन, बेनामी लेनदेन और वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं, बल्कि इस प्रोजेक्ट ने स्थानीय लोगों को भी मुश्किल में डाल दिया है।
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प्रोजेक्ट निर्माण स्थल का मुआयना करने और स्थानीय लोगों से बात कर पता चला कि अब तक यहां जो निर्माण हुआ है और जो हो रहा है, वह नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान निकाली गई मिट्टी और अन्य मलबा नाले में डाल दिया गया। यही नहीं, चेस्टर हिल के प्रोजेक्ट के साथ लगती पड़ग पंचायत के बेर गांव के लोगों की घासनियों को जाने वाले रास्ते भी प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ गए। अब लोगों को लंबे रास्ते से घासनियों तक जाना पड़ रहा है।
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नाले के बीचोंबीच प्रोजेक्ट कार्य में लगे मजदूरों के रहने के लिए टीन के शेड तक बना दिए। नाले के साथ ही अस्थायी बिना दरवाजों के शौचालय तक बना दिए। इससे क्षेत्र में गंदगी का आलम है। इसी गंदगी के बीच टीन शेड में प्रवासी मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे रहने को मजबूर हैं।
बेर गांव के लोगों का आरोप है कि नाला बंद होने से उनकी जमीनों की सिंचाई बुरी तरह प्रभावित हो गई। नाला पार करने वाला पुल टूट गया। समस्याएं यहीं खत्म नहीं हुईं, बल्कि लोगों की घासनियों के साथ लगती प्रोजेक्ट की जमीनें भवनों के निर्माण के लिए 90 डिग्री एंगल में काट दीं, जिससे बरसात में नुकसान होगा। घासनियों के मालिकों ने बताया कि प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में लगे प्रवासी मजदूर उनकी घासनियों में गंदगी डालते हैं, जिससे उन्होंने वहां से पशुओं के लिए घास काटना भी छोड़ दिया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सभी समस्याओं को लेकर कई बार उपायुक्त से मिले, लेकिन न तो प्रशासन ने कोई मुआयना किया और न समस्याओं का हल निकाला।
जमीन को बचाना भी मुश्किल हो गया
बेर गांव की सिंचाई परियोजना के पानी के चैंबर प्रोजेक्ट की डंप की गई मिट्टी से दब गए थे। ग्रामीणों ने खुद ही काम चलाने के लिए मिट्टी हटाई। नाले में डाली गई मिट्टी से सिंचाई परियोजना प्रभावित हुई है। - पुनीत शांडिल्य
हम पर डाला गया अतिरिक्त दबाव
हमारी जमीनें औने-पौने दामों पर खरीदने के लिए हम पर दबाव डाला गया। प्रवासी मजदूर हमारी जमीन पर गंदगी डालते हैं, शराब पीते हैं। जमीनों को गंदगी से बचाने के लिए कंटीले तारों से तारबंदी करनी पड़ी। - अमर लाल मेहता
अपनी जमीन से घास काटना मुश्किल
अपनी जमीन से घास काटना ही नहीं, बल्कि जमीन को बचाना भी अब मुश्किल हो गया है। अपली जमीन में काम करने से भी अब डर लगता है। जमीनों को ऐसे काटा है कि वहां पास में जाने से भी खतरा महसूस होता है। - वंदना
सड़क सुविधा देने की बात कागजों में
जमीनें खरीदते समय घासनियों को जाने के लिए सड़क देने की बात कागजों में लिखित में कही, लेकिन सड़क सुविधा तो दूर पैदल भी नहीं जाने देते। उपायुक्त को भी इस बारे में अवगत करवाया है। -रीटा ठाकुर, प्रधान, एकता महिला मंडल बेर
बेर गांव की सिंचाई परियोजना के पानी के चैंबर प्रोजेक्ट की डंप की गई मिट्टी से दब गए थे। ग्रामीणों ने खुद ही काम चलाने के लिए मिट्टी हटाई। नाले में डाली गई मिट्टी से सिंचाई परियोजना प्रभावित हुई है। - पुनीत शांडिल्य
हम पर डाला गया अतिरिक्त दबाव
हमारी जमीनें औने-पौने दामों पर खरीदने के लिए हम पर दबाव डाला गया। प्रवासी मजदूर हमारी जमीन पर गंदगी डालते हैं, शराब पीते हैं। जमीनों को गंदगी से बचाने के लिए कंटीले तारों से तारबंदी करनी पड़ी। - अमर लाल मेहता
अपनी जमीन से घास काटना मुश्किल
अपनी जमीन से घास काटना ही नहीं, बल्कि जमीन को बचाना भी अब मुश्किल हो गया है। अपली जमीन में काम करने से भी अब डर लगता है। जमीनों को ऐसे काटा है कि वहां पास में जाने से भी खतरा महसूस होता है। - वंदना
सड़क सुविधा देने की बात कागजों में
जमीनें खरीदते समय घासनियों को जाने के लिए सड़क देने की बात कागजों में लिखित में कही, लेकिन सड़क सुविधा तो दूर पैदल भी नहीं जाने देते। उपायुक्त को भी इस बारे में अवगत करवाया है। -रीटा ठाकुर, प्रधान, एकता महिला मंडल बेर

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