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Himachal News: अलग से होगी अब पार्ट टाइम पीएचडी के लिए प्रवेश प्रक्रिया, डिग्री में नहीं होगा कोई अंतर

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 21 Apr 2026 11:35 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने पार्ट टाइम पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला प्रक्रिया को नियमित पीएचडी से अलग कर नई व्यवस्था लागू कर दी है। नई व्यवस्था में विवि बिना नियमित सीटों को प्रभावित किए अतिरिक्त अभ्यर्थियों को शामिल कर सकेगा। जानें सबकुछ विस्तार से...

Himachal Admission Process for Part-Time PhD to be Conducted Separately No Distinction in the Degree
एचपीयू शिमला। - फोटो : संवाद
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विस्तार

एचपीयू ने पार्ट टाइम पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला प्रक्रिया को नियमित पीएचडी से अलग कर नई व्यवस्था लागू कर दी है। एडेंडम के अनुसार पार्ट टाइम पीएचडी का प्रवेश नियमित सीटों से अलग अतिरिक्त श्रेणी में होगा, जिन्हें कुल निर्धारित सीटों में नहीं जोड़ा जाएगा। यह कार्यक्रम सामान्य पीएचडी प्रवेश से अलग ट्रैक पर संचालित होगा।

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नई व्यवस्था में विवि बिना नियमित सीटों को प्रभावित किए अतिरिक्त अभ्यर्थियों को शामिल कर सकेगा। इसके साथ ही सुपरवाइजर को अपनी तय अधिकतम सीमा से अलग इन शोधार्थियों का मार्गदर्शन करना होगा। विवि ने इसे शोध अवसरों के विस्तार के रूप में लागू किया है जहां सीटों की सीमा बढ़ाए बिना दाखिलों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। पार्ट टाइम पीएचडी को केवल कार्यरत अभ्यर्थियों के लिए सीमित रखा गया है। इसके लिए स्पष्ट अनुभव आधारित पात्रता तय की गई है।
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नियमित पद पर कार्यरत शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए न्यूनतम तीन वर्ष का अनुभव अनिवार्य होगा जबकि गेस्ट या कांट्रेक्ट आधार पर कार्य करने वालों के लिए यह सीमा पांच वर्ष रखी गई है। अनुसंधान एवं विकास संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों या प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए भी पांच वर्ष का अनुभव आवश्यक किया गया है। अन्य पेशेवरों के लिए सात वर्ष का अनुभव अनिवार्य रखा गया है। चयन प्रक्रिया नियमित पीएचडी के समान ही रहेगी।

कुछ सीमित श्रेणियों को निर्धारित शर्तों के तहत प्रवेश परीक्षा से छूट दी गई है। ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर इंटरव्यू के जरिये मूल्यांकन होगा। इंटरव्यू के लिए 30 अंकों का विस्तृत ढांचा तय किया गया है, जिसमें अनुभव, नेट या जेआरएफ योग्यता, शोध प्रस्ताव, प्रस्तुति और उसके बचाव को शामिल किया गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि पार्ट-टाइम शोधार्थियों के लिए नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। इसमें यह उल्लेख होना चाहिए कि अभ्यर्थी को कोर्स वर्क और शोध कार्य के लिए आवश्यक समय और अवकाश मिलेगा। शोध कार्य विश्वविद्यालय परिसर या कार्यस्थल, दोनों स्थानों से किया जा सकेगा, लेकिन कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता साबित करनी होगी।

डिग्री में नहीं होगा कोई अंतर
पार्ट टाइम और फुल टाइम पीएचडी के बीच डिग्री में कोई अंतर नहीं होगा और दोनों के लिए समान शैक्षणिक मानक लागू रहेंगे।
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