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HP High Court: आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 21 Apr 2026 10:06 AM IST
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सार

अलग-अलग पंचायतों की ओर से आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Pradesh High Court Seeks Response from Government on Petitions Challenging Reservation Roster
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अलग-अलग पंचायतों की ओर से आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। सोमवार को इन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं में कोई भी अंतरिम आदेश पारित नहीं किए। लेकिन न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इन मामलों में सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के आदेश दिए है।

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सुनवाई 11 मई को होगी। 7 अप्रैल को आरक्षण रोस्टर जारी किया गया था। इसके मुताबिक कई पंचायतें और जिला परिषद कई वर्षों से आरक्षित ही रह गई हैं, इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाओं में नियमों को दरकिनार कर संबंधित सीटें आरक्षित करने का आरोप लगाया गया है। 

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तकनीकी योग्यता में 0.70 मीटर की कमी भी बर्दाश्त नहीं : हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी टेंडर में तकनीकी शर्तें अनिवार्य होती हैं और उनमें मामूली कमी होने पर भी किसी ठेकेदार को अयोग्य ठहराना सही है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने चंबा के कीरू में बनने वाले 125 मीटर लंबे आर्च ब्रिज से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है।

अदालत ने कहा कि टेंडर दस्तावेज तैयार करने वाला विभाग ही उसकी शर्तों का सबसे अच्छा निर्णायक होता है। जब तक कोई स्पष्ट दुर्भावना न दिखे, कोर्ट विशेषज्ञों द्वारा किए गए तकनीकी मूल्यांकन में हस्तक्षेप नहीं करेगा। अदालत के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि बुनियादी ढांचे के संवेदनशील प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। तकनीकी मूल्यांकन में अदालती तुलना की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

खंडपीठ ने कहा कि अदालती समीक्षा का उद्देश्य केवल यह देखना है कि निर्णय प्रक्रिया कानूनन सही है या नहीं, केवल कम बोली (एल-1) होना काफी नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई बोलीदाता तकनीकी रूप से ही अयोग्य है, तो उसकी कम वित्तीय बोली का कोई महत्व नहीं रह जाता। याचिकाकर्ता ने नेशनल हाईवे 154-ए पर 30.85 करोड़ की लागत से बनने वाले पुल के टेंडर में हिस्सा लिया था। 

विभाग ने तकनीकी जांच के बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। विभाग का तर्क था कि निविदा की शर्तों के अनुसार ठेकेदार के पास कम से कम 97.90 मीटर लंबे पुल निर्माण का पिछला अनुभव होना चाहिए था, जबकि याचिकाकर्ता का अनुभव केवल 97.20 मीटर का पाया गया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि उनकी निर्माण क्षमता में केवल 0.70 मीटर की कमी है और वह सबसे कम बोली लगाने वाले (एल-1) है, जिससे सरकार के 2.82 करोड़ बचेंगे। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी शर्तें अनिवार्य होती हैं और उनमें ढील नहीं दी जा सकती।

हेड क्राफ्ट मिस्ट्रेस शिक्षक श्रेणी में नहीं, सत्र विस्तार का लाभ देने से कोर्ट का इन्कार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में हेड क्राफ्ट मिस्ट्रेस का पद पर्यवेक्षी (सुपरवाइजरी) प्रकृति का है, न कि शिक्षण संकाय (टीचिंग फैकेल्टी) का। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने एकल जज के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि 27 अगस्त 2025 की अधिसूचना का लाभ केवल वास्तविक शिक्षण संवर्ग को ही मिल सकता है, गैर-शिक्षण या पर्यवेक्षी संवर्ग को नहीं।

खंडपीठ ने एकल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त कर्मचारी को शैक्षणिक सत्र के अंत तक पुनर्नियुक्त देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने पाया कि हेड क्राफ्ट मिस्ट्रेस का पद आईटीआई में ग्रुप इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्य करता है। अपीलकर्ता ने तर्क दिया था कि उन्होंने संस्थान में कक्षाएं ली थीं, इसलिए उन्हें शिक्षक माना जाना चाहिए।

हालांकि, अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी गैर-शिक्षण कर्मचारी को अतिरिक्त शिक्षण कार्य सौंपा जाता है, तो मात्र इस आधार पर वह 27 अगस्त 2025 की अधिसूचना के तहत सेवा विस्तार का हकदार नहीं हो जाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूलों या कॉलेजों के प्रिंसिपलों को सत्र विस्तार मिलता है, क्योंकि वे मूल रूप से शिक्षण संकाय का हिस्सा होते हैं। 
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