जलवायु परिवर्तन का असर: कीटों की कई प्रजातियां 300 मीटर ऊपर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुईं शिफ्ट
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के विशेषज्ञों का दावा है कि बढ़ते तापमान और बदलते पर्यावरण के कारण तितलियों, टिड्डों सहित कई छोटे कीटों की प्रजातियां अपने मूल निवास स्थान से करीब 300 मीटर ऊपर (उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर) शिफ्ट हो गई हैं।
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हिमालयी राज्यों में पिछले तीन दशक से लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का बेहद गंभीर और चौंकाने वाला असर सामने आने लगा है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के विशेषज्ञों का दावा है कि बढ़ते तापमान और बदलते पर्यावरण के कारण तितलियों, टिड्डों सहित कई छोटे कीटों की प्रजातियां अपने मूल निवास स्थान से करीब 300 मीटर ऊपर (उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर) शिफ्ट हो गई हैं। तितलियों की अपोलो प्रजातियों का एक समूह प्रमुख है, जिसमें 12 से 15 प्रजातियां यहां से हिमालय की ओर शिफ्ट हो चुकी हैं। इसके साथ ही टिड्डों की एक्रिडिडे प्रजाति का समूह भी अब निचले क्षेत्रों से लगभग खत्म हो चुका है। खासकर हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में यह बदलाव साफतौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि निचले इलाकों में गर्मी बढ़ने के कारण इन कीटों को जीवित रहने के लिए अनुकूल माहौल नहीं मिल पा रहा है, जिससे ये ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों की तरफ पलायन कर रहे हैं। खास बात यह भी है कि जो कीट अपने को यहां से शिफ्ट करने में असमर्थ हो रहे हैं, उनकी कुछ दुर्लभ प्रजातियां हमेशा के लिए विलुप्त भी हो चुकी हैं।
कृषि और बागवानी पर गहरा असर
कीटों की इन दुर्लभ प्रजातियों के शिफ्ट होने से स्थानीय कृषि और बागवानी पर गहरा संकट मंडराने लगा है। सेब और अन्य नकदी फसलों के परागण में इन कीटों और तितलियों की मुख्य भूमिका होती है। इनके अपने प्राकृतिक चक्र से हटने के कारण फसलों के उत्पादन और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
भविष्य के लिए बनी चुनौतियां
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के विशेषज्ञों का मानना है कि कीटों की प्रजातियों के विलुप्त होने से न केवल जैव विविधता को नुकसान होगा, बल्कि मानव जीवन पर भी इसका अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। खासकर इससे फसलों को नुकसान होगा क्योंकि यह दुर्लभ कीट हानिकारक कीटों को नष्ट करने में सहायक होते हैं।
वैज्ञानिक जुटे प्रजातियों के संरक्षण में
तीन से चार दशकों के बीच में तितलियों, टिड्डों और अन्य कीटों के कई समूह अब 300 मीटर ऊंचाई तक शिफ्ट हो चुके हैं। ये पर्यावरण मित्र हैं और मौसम के हिसाब से फसलों के लिए लाभदायक हैं और हानिकारक कीटों को भी नष्ट करते थे। वैज्ञानिक पर्यावरण संतुलन व कीटों के बचाव को लेकर काम करने में जुटे हैं। डॉ. नवनीत सिंह, प्रभारी, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण संस्थान, सोलन
