सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Climate Change: Rainfall increasing year after year in Kullu; warnings of floods and landslides.

जलवायु परिवर्तन: कुल्लू में साल दर साल बढ़ रही बारिश, बाढ़-भूस्खलन की चेतावनी, आंकड़ों में खुलासा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 16 Jun 2026 05:00 AM IST
विज्ञापन
सार

प्रदेश के कुल्लू जिले में अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ रही हैं। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में भविष्य में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी गई है।

Climate Change: Rainfall increasing year after year in Kullu; warnings of floods and landslides.
जलवायु परिवर्तन, संकट की आहट। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ रही हैं। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में भविष्य में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी गई है। यह शोध वाईएस परमार राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नाहन के शोधकर्ता रजत, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला की पुष्पा ठाकुर और जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कुल्लू की वैज्ञानिक रेणु लता ने किया है। शोधकर्ताओं ने कुल्लू और मनाली के 2005 से 2024 तक के दैनिक वर्षा आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि वार्षिक वर्षा में लगातार वृद्धि हो रही है। हर वर्ष औसतन छह से दस मिलीमीटर तक वर्षा बढ़ रही है। मानसून और इसके बाद की अवधि में वर्षा की मात्रा बढ़ी है। वहीं, सर्दियों में होने वाली वर्षा में गिरावट दर्ज की गई है। भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) तकनीक से पता चला कि 1200 मिलीमीटर से अधिक वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों का दायरा पिछले पांच वर्षों में बढ़ा है। जिले का 55 फीसदी से अधिक भूभाग 30 डिग्री से अधिक ढलान वाला है। तीव्र ढलानों पर भारी वर्षा से भूस्खलन और मलबा प्रवाह का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

पश्चिमी हिमालय में चरम मौसमी घटनाओं के बढ़ने की आशंका

इन रिपोर्टों में पश्चिमी हिमालय में चरम मौसमी घटनाओं के बढ़ने की आशंका जताई गई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि बढ़ती अतिवृष्टि भविष्य में स्थानीय आबादी, पर्यटन और कृषि के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। कुल्लू जिला पहले भी बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का सामना कर चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

शोध में आपदा तैयारी मजबूत करने के सुझाव

शोध में आपदा तैयारी मजबूत करने के सुझाव दिए गए हैं। इसमें मौसम निगरानी नेटवर्क का विस्तार और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी और जलवायु आधारित विकास योजनाओं को प्राथमिकता देना आवश्यक है। शोधकर्ताओं का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम न उठाने पर जोखिम और गंभीर हो सकते हैं।

विज्ञापन

- इस अध्ययन से यह बात और मजबूत होती है कि हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं लगातार अधिक बार और अधिक तीव्र होती जा रही हैं। नाजुक पर्वतीय भू-भाग में ऐसे बदलाव बाढ़, भूस्खलन और मलबा बहाव जैसी आपदाओं के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। अध्ययन के निष्कर्ष इस बात पर जोर देते हैं कि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणालियों यानी अर्ली वार्निंग सिस्टम, मौसम निगरानी, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे और जोखिम-आधारित योजना निर्माण को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है। - पुष्पेंद्र राणा, निदेशक, राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण निदेशक, हिमाचल प्रदेश।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed