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Himachal News: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू बोले- आरडीजी बंद होने का अर्थव्यवस्था और बजट पर पड़ेगा असर

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 09 Feb 2026 09:58 AM IST
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सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। पढ़ें पूरी खबर...
 

CM Sukhu said that the closure of RDG will have an impact on the economy and the budget
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (फाइल फोटो)। - फोटो : संवाद न्यूज एंजेसी
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विस्तार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) की समाप्ति किसी सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता के अधिकारों के हनन से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि हम इस मामले को लेकर भाजपा सांसदों, विधायकों के साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं। यदि एक बार आरडीजी का प्रावधान समाप्त किया जाता है तो राज्य की जनता के अधिकारों को सुरक्षित रख पाना कठिन हो जाएगा। 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
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राज्य सचिवालय में रविवार को हुई पत्रकार वार्ता में सुक्खू ने कहा कि वित्त सचिव की ओर से दी गई प्रस्तुति में भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि राज्य के बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है। देश में दूसरा सबसे अधिक आरडीजी का हिस्सा हिमाचल को मिलता है। जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद कर संग्रह की दर घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है, जबकि पूर्व में यह 13 से 14 प्रतिशत थी। जीएसटी लागू होने के बाद कर लगाने की क्षमता भी राज्य से छीन ली गई है। 
 
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जिन परियोजनाओं के 40 वर्ष पूरे, उन्हें लौटाना होगा
सीएम ने कहा कि सभी को मिलकर प्रदेश के हितों के लिए लड़ाई लड़नी होगी। जिन बिजली परियोजनाओं ने पूरा ऋण चुका दिया है, केंद्र सरकार को ऐसी परियोजनाओं पर कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा जिन परियोजनाओं के संचालन के 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें राज्य को वापस लौटाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से अब तक भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के 4500 करोड़ रुपये की बकाया राशि राज्य को नहीं मिली है, जबकि इस संबंध में सर्वाेच्च न्यायालय का फैसला भी आ चुका है।

उन्होंने कहा कि शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और इसे पंजाब सरकार से वापस लेने के लिए राज्य कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वासन दिया कि लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा। सरकार ने आम आदमी पर बोझ डाले बिना संसाधनों के सृजन की दिशा में नीतियां लागू की हैं। राज्य सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष वन क्षेत्र का मामला उठाया, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया है। इसके अतिरिक्त भूस्खलन से होने वाली आपदाओं के लिए भी धन आवंटन पर सहमति बनी है।
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