Himachal News: सीएम सुक्खू बोले- डगवार दूध संयंत्र शुरू होने पर प्रदेश में मिलेंगे गुणवत्ता पूर्ण दुग्ध उत्पाद
मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिला कांगड़ा के डगवार में इस साल ही दूध संयंत्र काम करना शुरू कर देगा। इससे प्रदेश में गुणवत्ता पूर्ण दुग्ध उत्पाद मिलेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिला कांगड़ा के डगवार में इस साल ही दूध संयंत्र काम करना शुरू कर देगा। इससे प्रदेश में गुणवत्ता पूर्ण दुग्ध उत्पाद मिलेंगे। प्रदेश की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विधायक सतपाल सिंह सत्ती, अनिल शर्मा, चंद्रशेखर और लोकेंद्र कुमार के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार प्रयासरत है। उधर, कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने दूध उत्पादकों को फरवरी-मार्च का भुगतान अप्रैल में करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की गारंटी के तहत एक परिवार से 10 किलोलीटर दूध लेने का प्रावधान किया गया है। डगवार संयंत्र की क्षमता डेढ़ लाख लीटर है, जहां दूध, घी और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सरकार डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सस्ती दरों पर सुविधाएं देने को भी तैयार है। दत्तनगर में रोजाना लगभग 70 हजार लीटर दूध एकत्रित हो रहा है, जहां 25 पैसे सस्ता दूध दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, हालांकि इसमें थोड़ा समय लगेगा। पांगी क्षेत्र में भी 20 हजार लीटर की क्षमता विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी हमारा दूध बाहर जा रहा है, लेकिन आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश के दूध की गुणवत्ता और अच्छी होगी। इससे पूर्व भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने दूध की अदायगी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोगों को दूध के पैसे समय पर नहीं मिल रहे हैं। 20 किलो से अधिक दूध का भुगतान नहीं किया जा रहा, जबकि यह बात सरकार की गारंटी में भी कही गई थी।
जवाब में कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि जनवरी 2026 तक दूध का भुगतान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि दूध मापदंड के अनुसार लिया जा रहा है। पहले 583 पंजीकृत सोसायटी थीं, जो अब बढ़कर 768 हो गई हैं। उन्होंने माना कि प्लांट में क्षमता के अनुसार काम नहीं हो पा रहा है, लेकिन अब दूध का पाउडर बनाने के बजाय घी बनाया जाएगा। विभाग का नया प्लांट जल्द बनने जा रहा है, जिसका उद्घाटन सितंबर तक करने का लक्ष्य है। ऊना और बिलासपुर में भी प्लांट स्थापित किए जाएंगे और कई नई सोसायटी रजिस्टर की गई हैं। विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि कितनी सोसायटी दूध लेने के लिए तैयार हैं और रजिस्ट्रेशन की स्थिति क्या है। उन्होंने कहा कि कई जगह दूध को 5 घंटे तक रखना पड़ता है, जिससे वह खराब हो जाता है और इसका नुकसान सोसायटी को उठाना पड़ता है।
उन्होंने चिलिंग स्टेशन खोलने की जरूरत बताई और पूछा कि बचा हुआ दूध किस तरह उपयोग में लाया जा रहा है, क्या उसे पाउडर बनाया जा रहा है, जबकि बाजार में मिल्क पाउडर की उपलब्धता भी कम है। विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि यह योजना पिछले दो वर्षों में धरातल पर उतरी है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उनके क्षेत्र में 30 सोसायटी रजिस्टर की गई हैं और जनता के बीच अच्छा संदेश गया है। उन्होंने कहा कि डगवार प्लांट की क्षमता करीब डेढ़ लाख लीटर है। धर्मपुर क्षेत्र से भी डगवार संयंत्र में सप्लाई भेजने का प्रावधान किया जाए। विधायक लोकेंद्र कुमार ने दत्तनगर की स्थिति को उठाते हुए कहा कि वहां करीब एक लाख लीटर दूध एकत्रित हो रहा है, लेकिन वजन मापने की व्यवस्था नहीं होने के कारण सोसायटी को करीब 600 लीटर दूध का नुकसान हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मिल्क फेडरेशन में अफसर जाना नहीं चाहते हैं। सोचते हैं कि यह छोटा उपक्रम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी हिमाचल में काफी मात्रा में दूध बाहरी राज्यों में स्थित निजी कंपनियों के संयंत्रों में जा रहा है। यह कंपनियां दूध से फैट निकालकर हमें ही वापस बेच रही हैं। इस व्यवस्था को अब बंद किया जाएगा।
अनुपूरक सवाल लंबे होने का दोष कैमरों का
प्रश्नकाल के दौरान विधायकों की ओर से लंबे अनुपूरक सवाल पूछे जाने पर अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि सवाल सटीक पूछे जाने चाहिए। इसमें अधिक समय नहीं लेना चाहिए। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इसके लिए सदन में लगे कैमरे दोषी हैं।