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Shimla News: चिट्टा तस्करी मामले में दोषी को 18 महीने का कठोर कारावास
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विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत का फैसला
वर्ष 2020 में दोषियों से बरामद किया था चिट्टा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की विशेष अदालत ने मादक पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायाधीश शिमला डॉ. परविंद्र सिंह अरोड़ा की अदालत ने चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के दोषी को 18 महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषी पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 27 मई 2020 का है जब देश में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन और प्रतिबंध लागू थे। एसआईयू की टीम संकट मोचन, तारादेवी और शोघी क्षेत्र में गश्त तथा ट्रैफिक चेकिंग पर थी। शाम करीब 6.30 बजे ममलीग की तरफ से आ रही एक टैक्सी को चेकिंग के लिए रोका गया। टैक्सी में चालक के अलावा दो युवक सवार थे जो संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पुलिस ने मौके से गुजर रहे दो स्थानीय लोगों को जांच में शामिल किया और गाड़ी की तलाशी ली। इस दौरान पिछली सीट पर बैठे रोहड़ू निवासी दोषी पीयूष के पैरों के नीचे से पॉलीथिन पाउच मिले जिसमें 9.138 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर दोषी पीयूष और रोहड़ू निवासी आरोपी संजू कुमार को गिरफ्तार किया था। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ही दूसरे आरोपी संजू कुमार की 6 जून 2025 को मृत्यु हो गई थी जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ कार्रवाई को समाप्त कर दिया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि पीयूष का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वह मुकदमे की शुरुआत से लगातार अदालत में पेश होता रहा है और उसकी पत्नी गर्भवती है जिसका ख्याल रखने वाला वह अकेला है। इसलिए उसके प्रति नरमी बरती जाए।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद समाज पर नशे के दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए दोषी को राहत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी के पास से बरामद नशे की मात्रा इंटरमीडिएट श्रेणी की है जो समाज के लिए बेहद हानिकारक है।
वर्ष 2020 में दोषियों से बरामद किया था चिट्टा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी की विशेष अदालत ने मादक पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायाधीश शिमला डॉ. परविंद्र सिंह अरोड़ा की अदालत ने चिट्टा (हेरोइन) तस्करी के दोषी को 18 महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषी पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 27 मई 2020 का है जब देश में कोविड-19 के कारण लॉकडाउन और प्रतिबंध लागू थे। एसआईयू की टीम संकट मोचन, तारादेवी और शोघी क्षेत्र में गश्त तथा ट्रैफिक चेकिंग पर थी। शाम करीब 6.30 बजे ममलीग की तरफ से आ रही एक टैक्सी को चेकिंग के लिए रोका गया। टैक्सी में चालक के अलावा दो युवक सवार थे जो संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। पुलिस ने मौके से गुजर रहे दो स्थानीय लोगों को जांच में शामिल किया और गाड़ी की तलाशी ली। इस दौरान पिछली सीट पर बैठे रोहड़ू निवासी दोषी पीयूष के पैरों के नीचे से पॉलीथिन पाउच मिले जिसमें 9.138 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ था।
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पुलिस ने मामला दर्ज कर दोषी पीयूष और रोहड़ू निवासी आरोपी संजू कुमार को गिरफ्तार किया था। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ही दूसरे आरोपी संजू कुमार की 6 जून 2025 को मृत्यु हो गई थी जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ कार्रवाई को समाप्त कर दिया था। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि पीयूष का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वह मुकदमे की शुरुआत से लगातार अदालत में पेश होता रहा है और उसकी पत्नी गर्भवती है जिसका ख्याल रखने वाला वह अकेला है। इसलिए उसके प्रति नरमी बरती जाए।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद समाज पर नशे के दुष्प्रभावों को ध्यान में रखते हुए दोषी को राहत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषी के पास से बरामद नशे की मात्रा इंटरमीडिएट श्रेणी की है जो समाज के लिए बेहद हानिकारक है।