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Shimla News: चेक बाउंस मामले में दोषी को छह महीने का कारावास
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दोषी पर 2.20 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
कोविड काल के दौरान उधार लिए थे 1.70 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुस्मिता शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी कनवर सिंह को छह महीने की साधारण कारावास और 2,20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। वसूली जाने वाली जुर्माना राशि में से मुआवजा सीधे शिकायतकर्ता को दिया जाएगा।
जुब्बल निवासी शिकायतकर्ता लोकिंदर सिंह दिलटा ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी कि अगस्त 2021 के शुरुआती दिनों में कोविड महामारी के कारण उत्पन्न हुई आर्थिक तंगी के चलते जुब्बल निवासी दोषी कनवर सिंह ने उनसे 1,70,000 रुपये की नकदी उधार ली थी। एक वर्ष का समय बीतने के बाद जब शिकायतकर्ता ने अगस्त 2022 के पहले सप्ताह में अपने पैसों की वापसी की मांग की तो दोषी ने अपनी कानूनी देनदारी चुकाने के लिए 26 दिसंबर 2022 को 1.70 लाख रुपये का एक चेक जारी किया था। यह चेक जब बैंक में लगाया गया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से 21 जनवरी 2023 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा था। निर्धारित समयावधि के भीतर भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
आरोपी पक्ष की ओर से बचाव में कुछ पुराने लेन-देन के रिकॉर्ड पेश किए गए, लेकिन अदालत ने पाया कि आरोपी यह साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रहा कि वह पुराने लेन-देन इस वर्तमान मामले से किस प्रकार जुड़े हुए हैं। अदालत ने दोषी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने सजा में नरमी बरतने की मांग की थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और तौर-तरीकों को देखते हुए किसी भी प्रकार की नरमी बरतना उचित नहीं है।
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कोविड काल के दौरान उधार लिए थे 1.70 लाख रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुस्मिता शर्मा की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी कनवर सिंह को छह महीने की साधारण कारावास और 2,20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि अदा न करने की स्थिति में दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। वसूली जाने वाली जुर्माना राशि में से मुआवजा सीधे शिकायतकर्ता को दिया जाएगा।
जुब्बल निवासी शिकायतकर्ता लोकिंदर सिंह दिलटा ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी कि अगस्त 2021 के शुरुआती दिनों में कोविड महामारी के कारण उत्पन्न हुई आर्थिक तंगी के चलते जुब्बल निवासी दोषी कनवर सिंह ने उनसे 1,70,000 रुपये की नकदी उधार ली थी। एक वर्ष का समय बीतने के बाद जब शिकायतकर्ता ने अगस्त 2022 के पहले सप्ताह में अपने पैसों की वापसी की मांग की तो दोषी ने अपनी कानूनी देनदारी चुकाने के लिए 26 दिसंबर 2022 को 1.70 लाख रुपये का एक चेक जारी किया था। यह चेक जब बैंक में लगाया गया तो वह बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से 21 जनवरी 2023 को आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा था। निर्धारित समयावधि के भीतर भुगतान न किए जाने पर शिकायतकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
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आरोपी पक्ष की ओर से बचाव में कुछ पुराने लेन-देन के रिकॉर्ड पेश किए गए, लेकिन अदालत ने पाया कि आरोपी यह साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रहा कि वह पुराने लेन-देन इस वर्तमान मामले से किस प्रकार जुड़े हुए हैं। अदालत ने दोषी के इस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने सजा में नरमी बरतने की मांग की थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और तौर-तरीकों को देखते हुए किसी भी प्रकार की नरमी बरतना उचित नहीं है।
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