{"_id":"6a54fcf1c73cff31330bdc74","slug":"hardships-persist-for-people-along-the-mini-kuftadhar-route-shimla-news-c-19-sml1002-752925-2026-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: मिनी कुफ्टाधार के रास्ते पर रार लोगों की दुश्वारियां बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: मिनी कुफ्टाधार के रास्ते पर रार लोगों की दुश्वारियां बरकरार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो किलोमीटर हिस्से में भरे कीचड़ से होकर आवाजाही करने को लोग मजबूर, भूस्खलन में ध्वस्त हुआ है रास्ता
प्लॉट की खोदाई में धंस गया है पक्का रास्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रुल्दुभट्ठा वार्ड के मिनी कुफ्टाधार में बड़श सड़क से कुफ्टाधार की रिहायशी कॉलोनी को जोड़ने वाले रास्ते को लेकर विवाद गहरा गया है।
वन विभाग, नगर निगम और एक भूमि मालिक के बीच चल रहे विवाद के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुए इस रास्ते के पुनर्निर्माण को लेकर गतिरोध बना हुआ है। रास्ता न बनने के कारण स्थानीय लोगों को दो किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है। सोमवार को नगर निगम पार्षद, वन विभाग के अधिकारी और राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान रास्ते के निर्माण को लेकर लंबी चर्चा हुई।
वन विभाग का कहना है कि जल्द ही भूमि की डिमार्केशन की जाएगी, जिसके बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। नगर निगम की ओर से मौके पर मौजूद पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि जनता को परेशानी हो रही है, इसलिए संबंधित व्यक्ति को निगम की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि वह रास्ते को पहले की तरह ही पुनर्निर्मित करे। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता कई दशकों से इस्तेमाल में है और इसे जल्द बहाल किया जाना चाहिए। वर्तमान में लोग कच्चे रास्तों से होकर सड़क तक पहुंचने को मजबूर हैं।
वन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वन भूमि पर डंगा लगाना संभव नहीं है। रेंज ऑफिसर शिमला शहरी सौरव जिंग्टा ने कहा कि जब तक भूमि की डिमार्केशन नहीं हो जाती, तब तक भूमि मालिक को लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करना चाहिए, ताकि उन्हें परेशानी न झेलनी पड़े। दरअसल एक भूमि मालिक ने अपने प्लॉट के कारण इस स्थान पर जेसीबी से खोदाई करवाई थी जिससे रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया। पार्षद सरोज ठाकुर ने मामला नगर निगम और वन विभाग के समक्ष उठाया। वन विभाग का कहना है कि यह खुदाई वन भूमि पर की गई थी और रास्ता भी वन भूमि पर ही बना हुआ था। नगर निगम के कहने पर संबंधित व्यक्ति रास्ता बनाने के लिए तैयार है, लेकिन वन विभाग ने इस पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्लॉट की खोदाई में धंस गया है पक्का रास्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। रुल्दुभट्ठा वार्ड के मिनी कुफ्टाधार में बड़श सड़क से कुफ्टाधार की रिहायशी कॉलोनी को जोड़ने वाले रास्ते को लेकर विवाद गहरा गया है।
वन विभाग, नगर निगम और एक भूमि मालिक के बीच चल रहे विवाद के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुए इस रास्ते के पुनर्निर्माण को लेकर गतिरोध बना हुआ है। रास्ता न बनने के कारण स्थानीय लोगों को दो किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ रहा है। सोमवार को नगर निगम पार्षद, वन विभाग के अधिकारी और राजस्व विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। इस दौरान रास्ते के निर्माण को लेकर लंबी चर्चा हुई।
वन विभाग का कहना है कि जल्द ही भूमि की डिमार्केशन की जाएगी, जिसके बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। नगर निगम की ओर से मौके पर मौजूद पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि जनता को परेशानी हो रही है, इसलिए संबंधित व्यक्ति को निगम की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि वह रास्ते को पहले की तरह ही पुनर्निर्मित करे। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रास्ता कई दशकों से इस्तेमाल में है और इसे जल्द बहाल किया जाना चाहिए। वर्तमान में लोग कच्चे रास्तों से होकर सड़क तक पहुंचने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
वन विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि वन भूमि पर डंगा लगाना संभव नहीं है। रेंज ऑफिसर शिमला शहरी सौरव जिंग्टा ने कहा कि जब तक भूमि की डिमार्केशन नहीं हो जाती, तब तक भूमि मालिक को लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार करना चाहिए, ताकि उन्हें परेशानी न झेलनी पड़े। दरअसल एक भूमि मालिक ने अपने प्लॉट के कारण इस स्थान पर जेसीबी से खोदाई करवाई थी जिससे रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया। पार्षद सरोज ठाकुर ने मामला नगर निगम और वन विभाग के समक्ष उठाया। वन विभाग का कहना है कि यह खुदाई वन भूमि पर की गई थी और रास्ता भी वन भूमि पर ही बना हुआ था। नगर निगम के कहने पर संबंधित व्यक्ति रास्ता बनाने के लिए तैयार है, लेकिन वन विभाग ने इस पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन