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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: लाहौल-स्पीति और पांगी में पंचायती राज संस्थाओं को भंग करने की अधिसूचना पर लगाई रोक

Wed, 01 Jul 2026 05:40 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 01 Jul 2026 05:40 PM IST
सार

 मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता और उनके जैसे अन्य प्रतिनिधि अगले आदेश तक अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। इसके साथ ही राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। 

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High Court Major Ruling: Stay on notification dissolving Panchayati Raj institutions in Lahaul Spiti and Pangi
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लाहौल-स्पीति जिले के उप मंडल केलांग और चंबा जिले के उप मंडल पांगी में पंचायती राज संस्थाओं को तत्काल प्रभाव से भंग करने के सरकार के 24 जून 2026 के विवादित अधिसूचना और उसमें किए गए बदलावों पर तुरंत अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता और उनके जैसे अन्य प्रतिनिधि अगले आदेश तक अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे। इसके साथ ही राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी। खंडपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता दीपक चौहान और अन्य की ओर से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इन क्षेत्रों में मौजूदा पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 17 अक्तूबर 2026 को समाप्त होना तय था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों के अनुपालन में, राज्य सरकार और चुनाव आयोग ने मई 2026 में ही नए चुनाव करवा दिए थे। इसके बाद, सरकार ने 24 जून 2026 को इसको लेकर एक अधिसूचना जारी कर पुरानी पंचायतों को तुरंत भंग कर दिया और नई चुनी गई संस्थाओं की पहली बैठक की तारीख 18 अक्तूबर से बदलकर 27 जून 2026 कर दी। इससे एक साथ दो चुनी हुई संस्थाएं अस्तित्व में आ गईं और मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल समय से पहले ही खत्म कर दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 243 ई का हवाला देते हुए तर्क दिया कि किसी भी पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक से पूरे पांच वर्ष का होता है।

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कानून में कोई भी संशोधन कर इस पांच साल की अवधि को कम नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जनवरी 2026 में किया गया नया संशोधन पिछली तारीखों से लागू नहीं हो सकता। वहीं राज्य की ओर से हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 120(4) का हवाला दिया (जिसे 9 जनवरी 2026 को जोड़ा गया था)। उन्होंने दलील दी कि यदि विपरीत परिस्थितियों या बहिष्कार के कारण चुनाव देर से होते हैं, तो इन क्षेत्रों की पंचायतों का कार्यकाल राज्य की अन्य पंचायतों के साथ ही (एक साथ) समाप्त होना चाहिए। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के पास एक निहित कानूनी अधिकार है। इसलिए, 24 जून 2026 की अधिसूचना दोषपूर्ण है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों के पद पर बने रहने के अधिकार को इस तरह छीना नहीं जा सकता।

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