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Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- 100 रुपये प्रतिदिन कमाने वाला परिवार पक्का मकान और बाइक नहीं रख सकता

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 02 Apr 2026 05:00 AM IST
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सार

अदालत ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि परिवार की सालाना आय 35 हजार है, तो इसका मतलब है कि परिवार की अधिकतम दैनिक आय सिर्फ 100 हुई। 

High Court stated: A family earning 100 per day cannot own a permanent house and a motorcycle.
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भर्ती से जुड़े एक मामले में कहा है कि यदि किसी परिवार की वार्षिक आय 35,000 (यानी लगभग 100 प्रतिदिन) है, तो इतने कम संसाधनों में छह सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण करने के साथ पक्का मकान बनाना और मोटरसाइकिल रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए अपीलीय प्राधिकारी के निर्णय को सही ठहराया है, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपनी वार्षिक पारिवारिक आय 35,000 से कम बताई थी।

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अदालत ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि परिवार की सालाना आय 35 हजार है, तो इसका मतलब है कि परिवार की अधिकतम दैनिक आय सिर्फ 100 हुई। याचिकाकर्ता चाहती है कि अदालत यह विश्वास कर ले कि मात्र 100 रुपये रोजाना में वह खुद अपने पति और 4 बच्चों (कुल 6 सदस्यों) का पेट भी पाल रही थी और मोटरसाइकिल का खर्च भी उठा रही थी। अदालत ने आगे कहा कि सरकारी अनुदान की राशि से रसोई सहित दो कमरों का पूरा पक्का मकान बनना संभव नहीं है। चूंकि याचिकाकर्ता की जीवनशैली और संपत्तियां दर्शाती हैं कि उनकी आय छिपाई गई थी, इसलिए अदालत ने उनकी याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया। यह मामला मंडी जिले की बल्ह तहसील में स्थित एक आंगनबाड़ी केंद्र का है।

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वर्ष 2020 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए हुई इस भर्ती प्रक्रिया में याचिकाकर्ता और अन्य प्रतिवादी उम्मीदवारों ने भाग लिया था। चयन प्रक्रिया के बाद विवाद तब बढ़ा जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आय प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए अपील दायर कर दी। एसडीएम बल्ह (अपीलीय प्राधिकारी) ने जांच के बाद पाया कि याचिकाकर्ता के पास दो पक्के मकान हैं, वह सिलाई के काम के लिए किराए पर दुकान चला रही हैं और उनके पति के पास मोटरसाइकिल भी है। एसडीएम कोर्ट ने माना कि 35 हजार से कम वार्षिक आय वाले व्यक्ति के लिए ये संपत्तियां रखना मुमकिन नहीं है और उनका आय प्रमाण पत्र रद्द कर दिया।

इसी आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दलील दी कि याचिकाकर्ता के पास आय का कोई ठोस जरिया नहीं है।जो पक्का मकान बना है, वह वर्ष 2017-18 में अनुसूचित जाति गृह अनुदान योजना के तहत मिली 1.30 लाख की सरकारी मदद से बना था। डिस्क (रीढ़ की हड्डी) की समस्या के कारण सिलाई की दुकान पिछले 3 साल से बंद थी और मकान मालिक को कोई किराया नहीं दिया गया था, सिर्फ बिजली का बिल भरा गया था।पति के पास मौजूद मोटरसाइकिल पुरानी सेकंड हैंड खरीदी गई थी।

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